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दुनिया का पहला देश जिसने modern bank को पूरी तरह खत्म कर दिया ,अफगानिस्तान में अब सिर्फ इस्लामिक बैंकिंग

 अफगानिस्तान का फैसला जिसने दुनिया को चौंका दिया

नवंबर 2025 में अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक Da Afghanistan Bank ने एक ऐतिहासिक एलान किया। बैंक ने साफ कहा कि अफगानिस्तान में परंपरागत यानी modern banking system पूरी तरह बंद हो गई है और अब देश के सभी commercial banks सिर्फ इस्लामिक तरीकों से काम करेंगे।  इस एलान के साथ अफगानिस्तान दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया जिसने modern banking को पूरी तरह खत्म करके 100% इस्लामिक बैंकिंग लागू कर दी। यह फैसला सुनने में छोटा लगता है लेकिन इसके असर बहुत गहरे हैं।

Source: wikimedia 

इस्लामिक बैंकिंग होती क्या है?

जो लोग नहीं जानते उनके लिए समझाना ज़रूरी है। इस्लामिक बैंकिंग में ब्याज यानी interest पूरी तरह हराम माना जाता है। इसमें बैंक पैसे उधार देकर ब्याज नहीं लेता बल्कि खरीद-फरोख्त के ज़रिए मुनाफा कमाता है।  यानी अगर तुम्हें घर खरीदना है तो बैंक खुद वो घर खरीदेगा और फिर तुम्हें किश्तों में बेचेगा। ब्याज का कोई सवाल नहीं। यह सिस्टम इस्लाम के उस सिद्धांत पर आधारित है जिसमें पैसे से पैसा कमाना यानी सूदखोरी को गैरकानूनी माना जाता है।

तालिबान ने कैसे किया यह बदलाव?

2021 में तालिबान के सत्ता में आते ही यह साफ हो गया था कि वो परंपरागत बैंकिंग को खत्म करेंगे। तालिबान के नेतृत्व में केंद्रीय बैंक ने एक सात सदस्यीय समिति बनाई जिसका काम था पुराने banking कानूनों को बदलकर पूरी तरह इस्लामिक बैंकिंग के लिए नया ढांचा तैयार करना।  तालिबान ने साफ कहा कि इस्लामिक बैंकिंग में निवेश, कर्ज़ या जमा पर ब्याज से कमाई करना पूरी तरह वर्जित है। धीरे-धीरे सभी commercial banks को इस्लामिक तरीकों में बदला गया और नवंबर 2025 तक यह काम पूरा हो गया।

Source: wikimedia 

आम अफगान पर क्या पड़ा असर?

यह बदलाव सुनने में अच्छा लगता है लेकिन ज़मीन पर हकीकत बहुत मुश्किल है। World Bank की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिक बैंकिंग में अनिवार्य बदलाव की वजह से banking sector की वित्तीय मध्यस्थता की भूमिका बुरी तरह प्रभावित हुई है। दिसंबर 2022 से दिसंबर 2023 के बीच अफगान बैंकों ने करीब 11 फीसदी ग्राहक खो दिए। लोगों का बैंकों पर से भरोसा उठ गया। अफगानिस्तान के बैंक SWIFT नेटवर्क से भी कटे हुए हैं जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन लगभग नामुमकिन हो गया है। इसी वजह से ज़्यादातर अफगान अब hawala यानी अनौपचारिक दलालों के ज़रिए पैसे भेजते हैं। 

दुनिया में और कहां है इस्लामिक बैंकिंग?

अफगानिस्तान अकेला नहीं है जहां इस्लामिक बैंकिंग है लेकिन 100% लागू करने वाला पहला देश ज़रूर है। दुनिया के कई देशों में इस्लामिक बैंकिंग का बड़ा हिस्सा है -

ईरान :1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान ने पूरी banking system को इस्लामिक बना दिया था लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से यह system बहुत कमज़ोर है।

सऊदी अरब :यहां के बैंकों का बड़ा हिस्सा इस्लामिक है। Al Rajhi Bank दुनिया का सबसे बड़ा इस्लामिक बैंक है।

मलेशिया :यहां इस्लामिक और परंपरागत दोनों बैंकिंग साथ-साथ चलती हैं। मलेशिया इस्लामिक finance का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।

UAE, कुवैत, बहरीन : इन देशों में भी इस्लामिक बैंकिंग का बड़ा हिस्सा है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश : यहां भी इस्लामिक बैंकिंग तेज़ी से बढ़ रही है लेकिन परंपरागत बैंकिंग अभी भी चलती है।

भारत : भारत में इस्लामिक बैंकिंग की इजाज़त नहीं है। RBI ने इसे कई बार खारिज किया है।

दुनिया के लिए क्या संदेश है?

2019 तक दुनिया भर में इस्लामिक वित्त का कुल कारोबार करीब 3.95 trillion dollar का था और 2026 तक यह 5.9 trillion dollar तक पहुंचने का अनुमान है। यानी इस्लामिक बैंकिंग दुनिया में तेज़ी से बढ़ रही है। अफगानिस्तान ने इसे 100% लागू करके एक नई मिसाल तो कायम की है लेकिन सवाल यह है कि क्या एक देश जो पहले से आर्थिक संकट में है, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहा है और SWIFT से कटा हुआ है, वो इस बदलाव का फायदा उठा पाएगा?

क्या यह सफल होगा?

अफगानिस्तान के एक जाने-माने अर्थशास्त्री ने कहा कि बिना banking system के एक आधुनिक अर्थव्यवस्था अधूरी है। जिन देशों में बैंक लोगों की जमा राशि को व्यवसाय और उद्योग में लगाते हैं वो देश बेहतर होते हैं। अफगानिस्तान का यह प्रयोग दुनिया देख रही है। अगर यह सफल हुआ तो कई इस्लामिक देश इसी राह पर चल सकते हैं। और अगर नाकाम हुआ तो यह साबित होगा कि धर्म आधारित आर्थिक नीतियां आज के वैश्विक बाज़ार में टिक नहीं सकतीं।




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