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80 साल बाद फिर परमाणु की आग — जापान की चाल से चीन बेचैन, UN में मची खलबली!

 29 Pages जिसने दुनिया को हिला दिया

चीन के विदेश और रक्षा मंत्रालय ने एक साथ बयान जारी करके जापान पर दोबारा सैन्यीकरण का आरोप लगाया। इसके साथ ही चीन के दो बड़े थिंक टैंकों ने मिलकर एक 29 पन्नों की रिपोर्ट जारी की जिसमें जापान की "दक्षिणपंथी ताकतों" को विश्व शांति के लिए "गंभीर खतरा" बताया गया।  यह रिपोर्ट सुनने में भले ही राजनीतिक लगे, लेकिन इसके पीछे की असली चिंता बहुत गहरी है — जापान के पास परमाणु हथियार बनाने की पूरी क्षमता है और चीन को डर है कि अब वो इस क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है।

Source: wikimedia 

UN के पास क्यों पहुंचा चीन?

चीन ने UN को एक दस्तावेज़ सौंपा और मांग की कि जापान का परमाणु हथियार बनाने का मुद्दा UN की बैठक में एक "महत्वपूर्ण एजेंडा आइटम" के रूप में शामिल किया जाए। चीन मई में UN Security Council की rotating presidency संभाल रहा है इसलिए उसके पास यह मुद्दा उठाने का सही मौका था। चीन ने अपने दस्तावेज़ में चेतावनी दी कि "जापान की दक्षिणपंथी ताकतों को शक्तिशाली आक्रामक हथियार बनाने या परमाणु हथियार रखने देना दुनिया को एक बार फिर नुकसान पहुंचाएगा।" 

Source: social media 

जापान के पास है "तहखाने का बम"

जापान ने परमाणु अप्रसार संधि NPT पर हस्ताक्षर किए हुए हैं जो उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जापान के पास "तहखाने का बम" है यानी परमाणु हथियार बनाने की सामग्री और तकनीक दोनों मौजूद हैं।  जापान के पास कई टन प्लूटोनियम का भंडार है। अनुमान है कि राजनीतिक फैसला होते ही जापान महज़ छह महीने में परमाणु हथियार बना सकता है। चीनी परमाणु विशेषज्ञों का मानना है कि जापान के पास तकनीकी क्षमता तो है ही, राजनीतिक इच्छाशक्ति भी बढ़ रही है और वो तीन साल से भी कम समय में परमाणु हथियार बना सकता है। 

जापान की प्रधानमंत्री ने क्या किया?

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सीधे जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों को बदलने, परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां लाने और "विस्तारित परमाणु निवारण" को बढ़ावा देने की मांग करके अपनी महत्वाकांक्षाएं उजागर कर दी हैं। फरवरी 2026 में हुए snap election में बड़ी जीत के बाद ताकाइची ने "महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव" करने का वादा किया था जिसमें जापान का संविधान बदलना भी शामिल है। 

जापान के तीन गैर-परमाणु सिद्धांत क्या हैं?

यह समझना ज़रूरी है कि जापान के तीन गैर-परमाणु सिद्धांत क्या हैं जिन्हें लेकर इतना बवाल मचा है। पहला, परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे। दूसरा, परमाणु हथियार नहीं रखेंगे। तीसरा, परमाणु हथियार देश में नहीं लाएंगे। यह सिद्धांत 1967 से चले आ रहे हैं और इसके पीछे की वजह है हिरोशिमा और नागासाकी की वो तबाही जो 1945 में अमेरिका के परमाणु हमले में हुई थी। लेकिन अब जापान की सत्तारूढ़ पार्टी इन सिद्धांतों पर दोबारा बहस शुरू कर चुकी है और गर्मियों 2026 तक सिफारिशें देने की तैयारी है। 

चीन क्यों है इतना डरा हुआ?

चीन का डर समझ में आता है। एशिया में पहले से ही चीन और जापान के बीच समुद्री विवाद चल रहा है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने जापान पर "घातक हथियार बेचने" और अंतरराष्ट्रीय भावनाओं के खिलाफ जाकर परमाणु हथियारों की वकालत करने का आरोप लगाया। अगर जापान परमाणु हथियार बना लेता है तो एशिया में शक्ति का संतुलन बिल्कुल बदल जाएगा और चीन की बढ़त कमज़ोर पड़ जाएगी। इसीलिए चीन इतनी तेज़ी से UN तक पहुंचा।

जापान का जवाब, हम परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे

जापान के Chief Cabinet Secretary Minoru Kihara ने साफ कहा है कि देश की परमाणु नीति नहीं बदली है और जापान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।  लेकिन दूसरी तरफ जापान के कुछ बड़े नेता खुलकर परमाणु हथियारों की वकालत कर रहे हैं। एक वरिष्ठ जापानी अधिकारी ने Asahi Shimbun को बताया कि बदलते सुरक्षा माहौल को देखते हुए उनका मानना है कि "जापान को परमाणु हथियार रखने चाहिए।"  यानी सरकार कह कुछ रही है और अंदर की आवाज़ें कुछ और बोल रही हैं।

हिरोशिमा की यादें और आज का जापान

यह पूरी बहस और भी दिलचस्प इसलिए हो जाती है क्योंकि जापान वो देश है जिसने खुद परमाणु हमले की तबाही झेली है। 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में लाखों लोग मारे गए थे। परमाणु बम बचे लोगों के संगठन Nihon Hidankyo ने इन सिद्धांतों पर दोबारा बहस की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह जापान की पारंपरिक नीति के खिलाफ है।  लेकिन नई पीढ़ी के नेताओं के लिए वो यादें धुंधली हो रही हैं और उन्हें चीन और उत्तर कोरिया का खतरा ज़्यादा असली लगता है।

दुनिया के लिए क्या मायने रखता है यह विवाद?

अगर जापान परमाणु हथियार बनाने की तरफ बढ़ता है तो इसके असर सिर्फ एशिया तक नहीं रहेंगे। दक्षिण कोरिया भी परमाणु हथियारों की बात करने लगेगा। उत्तर कोरिया को और बहाना मिलेगा। पूरी दुनिया में परमाणु अप्रसार की जो व्यवस्था है वो हिल जाएगी। Henry Kissinger ने अपनी मृत्यु से पहले भविष्यवाणी की थी कि जापान पांच साल में परमाणु शक्ति बन जाएगा।  क्या वो भविष्यवाणी सच होने की तरफ बढ़ रही है, यह सवाल आज पूरी दुनिया पूछ रही है।



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