जब अचानक रुक गया पूरा काफिला
19 अप्रैल 2026। पश्चिम बंगाल। चुनावी शोर अपने पूरे जोश पर था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस दिन पुरुलिया, झारग्राम, मेदिनीपुर और बिष्णुपुर में लगातार चार धुआंधार रैलियां कर चुके थे। थकान होनी चाहिए थी, लेकिन मोदी हैं तो थकान को भी थका देते हैं। झारग्राम में विजय संकल्प सभा खत्म करने के बाद काफिला हेलीपैड की तरफ बढ़ रहा था। कॉलेज मोड़ के पास अचानक गाड़ियाँ रुकीं। सुरक्षाकर्मी चौंके, आसपास के लोग हैरान। और फिर जो हुआ उसने पूरे देश का दिल जीत लिया।
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"भाई, स्पेशल झालमुड़ी बनाओ"
मोदी गाड़ी से उतरे और सीधे चल दिए सड़क किनारे लगी एक छोटी सी झालमुड़ी की दुकान की तरफ। दुकानदार विक्रम साह की नज़र पड़ी तो आँखें फटी की फटी रह गईं। यह सपना है या हकीकत? देश के प्रधानमंत्री उसकी दस रुपये वाली दुकान पर? मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा "भाई, मुझे स्पेशल झालमुड़ी बनाकर दो।" बस इतना सुनते ही विक्रम के हाथ चल पड़े। मिर्च, मसाले, मूंगफली, तीखा अचार सब कुछ एक साथ और ताज़ी झालमुड़ी तैयार। झालमुड़ी बनाते-बनाते विक्रम ने हिम्मत करके पूछा "सर, प्याज डालूं?" मोदी ने पलकें झपकाए बिना जवाब दिया "प्याज तो खाता हूं भाई, लेकिन किसी का दिमाग नहीं खाता।" पूरा माहौल ठहाकों से गूंज उठा।
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पहले बच्चों को खिलाया, फिर खुद चखा
झालमुड़ी का ठोंगा हाथ में आते ही मोदी ने सबसे पहले आसपास खड़े छोटे-छोटे बच्चों को अपने पास बुलाया। अपने हाथों से उन्हें खिलाया। पास खड़ी महिलाओं को भी बाँटा। और उसके बाद खुद मुँह में डाला। एक पल रुके, स्वाद लिया और विक्रम की तरफ देखकर बोले "बहुत बढ़िया बनी है भाई।" यह सुनकर विक्रम की आँखें भर आईं।
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वो दस रुपये जो करोड़ों ने देखे
झालमुड़ी खाने के बाद मोदी ने जेब में हाथ डाला और दस रुपये निकाले। विक्रम ने हाथ जोड़कर मना कर दिया "आप हमारी दुकान पर आए, यही हमारे लिए सब कुछ है।" लेकिन मोदी टस से मस नहीं हुए। बोले "ऐसे नहीं चलेगा भाई" और पैसे उसके हाथ में रख दिए। यह दस रुपये का वो लम्हा था जिसने पूरे देश को छू लिया। न कोई दिखावा, न कोई नाटक बस एक इंसान जो जानता है कि मेहनत की कीमत चुकानी चाहिए।
झालमुड़ी बंगाल की आत्मा
जो लोग बंगाल गए हैं वो जानते हैं कि झालमुड़ी सिर्फ एक खाने की चीज़ नहीं है। यह बंगाल की रूह है। हर गली के नुक्कड़ पर, हर बस स्टैंड पर, हर रेलवे स्टेशन के बाहर एक झालमुड़ी वाला ज़रूर मिलेगा। मुरमुरे, सरसों का तेल, कच्चा प्याज, हरी मिर्च, नींबू और तीखा अचार इन सबको मिलाकर एक अखबार के ठोंगे में परोसी जाती है यह झालमुड़ी। इसकी कीमत दस रुपये से शुरू होती है और स्वाद किसी पाँच सितारा होटल के खाने को भी मात देता है। बंगाल में कोई भी हो अमीर हो या गरीब, नेता हो या आम आदमी झालमुड़ी सबकी पसंद है। मोदी ने जब उस दुकान पर रुककर झालमुड़ी खाई तो उन्होंने बंगाल की उसी आत्मा को छुआ जो इस मिट्टी में बसती है।
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