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राहुल गांधी को कोलकाता में नहीं मिली रैली की इजाज़त ,कांग्रेस का सीधा वार, बंगाल ममता की जागीर नहीं!

 तीन रैलियाँ, एक भी अनुमति नहीं

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले एक बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 23 अप्रैल को कोलकाता में तीन रैलियाँ होनी थीं  पहली रामलीला पार्क यानी पार्क सर्कस मैदान में, दूसरी मटियाबुर्ज में और तीसरी हुगली जिले के श्रीरामपुर स्टेडियम में। लेकिन तीनों के लिए अनुमति नहीं मिली। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी 21 अप्रैल की शाम छह बजे तक इंतज़ार करते रहे  लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया और अंत में दौरा रद्द करना पड़ा।

Source: wikimedia 

कांग्रेस का सीधा आरोप , ममता के इशारे पर रोका गया दौरा

कांग्रेस ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि यह सब ममता बनर्जी सरकार के इशारे पर हुआ। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार ने कहा कि तृणमूल और BJP दोनों राहुल गांधी की मालदा और मुर्शिदाबाद में हुई सफल रैलियों से घबरा गई हैं और इसीलिए कोलकाता में उनकी रैली रोकी गई। कांग्रेस ने यह भी कहा कि बंगाल किसी की निजी जागीर नहीं है  यहाँ हर राजनीतिक दल को चुनाव प्रचार का पूरा हक है और लोकतंत्र में इस तरह विपक्ष को दबाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ममता सरकार का जवाब , नियम तोड़ा तो इजाज़त कैसे मिले?

Source: wikimedia 

दूसरी तरफ ममता सरकार की मंत्री शशि पांजा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक सभा के लिए सुविधा पोर्टल के ज़रिये दो से सात दिन पहले आवेदन करना अनिवार्य है। उनका कहना था कि यह नियम सभी राजनीतिक दलों पर बराबर लागू होता है  चाहे BJP हो, कांग्रेस हो या कोई और। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में अभी कार्यवाहक सरकार है इसलिए इस मामले में जवाब देना चुनाव आयोग का काम है।

कांग्रेस और टीएमसी दिल्ली में साथ, बंगाल में आमने-सामने

यह विवाद समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अक्सर BJP के खिलाफ एक साथ खड़े नज़र आते हैं। ममता INDIA गठबंधन का भी कुछ समय हिस्सा रही थीं। लेकिन पश्चिम बंगाल की धरती पर यह दोस्ती पूरी तरह खत्म हो जाती है। यहाँ कांग्रेस वाम मोर्चे के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है और उसका सीधा मुकाबला टीएमसी से है। ऐसे में ममता सरकार के लिए कांग्रेस को अपनी ज़मीन पर जगह देना राजनीतिक रूप से घाटे का सौदा है।

2021 में एक भी सीट नहीं इस बार कांग्रेस की क्या है उम्मीद?

2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद शर्मनाक रहा था पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इस बार कांग्रेस की कोशिश है कि वो टीएमसी और BJP के बीच के इस दो-तरफा मुकाबले को त्रिकोणीय बनाए। राहुल गांधी की रैलियाँ इसी रणनीति का हिस्सा हैं। मालदा और मुर्शिदाबाद में जो भीड़ जुटी उसने पार्टी का मनोबल बढ़ाया था और शायद इसी वजह से कोलकाता की रैली रोकने की कोशिश हुई।

अच्छी खबर 25 अप्रैल को होंगी रैलियाँ

एक दिन की खींचतान के बाद 22 अप्रैल को पुलिस ने अनुमति दे दी। कांग्रेस ने घोषणा की कि राहुल गांधी की पहली रैली अब 25 अप्रैल को कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में दोपहर ढाई बजे होगी और दूसरी रैली उसी दिन हुगली जिले के श्रीरामपुर में होगी। यानी एक दिन की देरी हुई लेकिन राहुल गांधी बंगाल आएंगे ज़रूर।

बंगाल का चुनावी खेल तारीखें और दाँव

पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान हो रहा है। पहले चरण में 23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर और दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होगा। नतीजे 4 मई को आएंगे। टीएमसी लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश में है, BJP सरकार बनाने का दावा कर रही है और कांग्रेस-वाम गठबंधन इस बार कुछ अलग करने की उम्मीद लेकर मैदान में है।

यह सिर्फ अनुमति का मामला नहीं

यह विवाद सिर्फ एक रैली की अनुमति का मामला नहीं है। यह उस बड़े सवाल की तरफ इशारा करता है कि क्या सत्ता में बैठी पार्टी अपने विरोधियों को चुनाव प्रचार से रोक सकती है? क्या प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में हो रहा है? कांग्रेस कह रही है हाँ, टीएमसी कह रही है नहीं  और अब फैसला उस जनता के हाथ में है जो 23 और 29 अप्रैल को वोट डालेगी।

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