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बंगाल में 91 लाख वोट डिलीट — SIR का वो विवाद जिसने पूरे चुनाव को हिला दिया

वायरल पोस्ट जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया

बंगाल चुनाव के बीच Twitter पर एक पोस्ट वायरल हुई जिसमें लिखा था , एक बूथ में कुल 1000 वोटर, 2021 में 800 ने वोट डाला यानी 80%, लेकिन 2026 में SIR के दौरान 120 वोट डिलीट हुए, अब कुल 880 वोटर बचे, फिर भी 800 ने वोट डाला यानी 91%। लोगों ने कहा — वोटर कम हुए तो प्रतिशत कैसे बढ़ा? यह सवाल देखते-देखते लाखों लोगों तक पहुँच गया और SIR ट्रेंडिंग में आ गया।

Source: wikimedia 

SIR है क्या आखिर?

SIR यानी Special Intensive Revision — यह चुनाव आयोग की वो प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को साफ किया जाता है। सरकार का कहना था कि इससे फर्जी, मृत या डुप्लीकेट वोटरों को हटाया जाएगा। लेकिन जो हुआ वो चौंकाने वाला था। SIR प्रक्रिया के अंतर्गत राज्य में लगभग 90 लाख से ज़्यादा वोटरों के नाम काटकर हटाए गए जो कुल मतदाताओं का लगभग 12% बताया जा रहा है। 

Source: wikimedia 

असली लोगों के नाम भी कट गए

मालदा के दूरदराज के इलाकों में ऐसे कई परिवार हैं जिनके सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए जबकि वे दशकों से मतदान करते आ रहे हैं। पीड़ितों में रहीम एसके और रवि इस्लाम जैसे लोग शामिल हैं जिनकी पुश्तें यहाँ रहती थीं। उनका कहना है कि सभी ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने के बावजूद उनके नाम डिलीट हो गए। यहाँ तक कि 65 चुनाव अधिकारियों के नाम भी वोटर लिस्ट से हट गए जिन्हें खुद चुनाव ड्यूटी पर तैनात किया गया था। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं दी राहत

लाखों लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। TMC नेता कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं और इन लोगों को मतदान की अनुमति दी जाए। लेकिन CJI सूर्यकांत ने साफ कह दिया कि ऐसा करना पूरी तरह सवाल के बाहर है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बताया कि SIR प्रक्रिया के तहत लंबित अपीलों की वास्तविक संख्या करीब 34 लाख है। यानी 34 लाख लोग वोट नहीं डाल पाए।

फिर 93% वोटिंग कैसे हुई?

यह सबसे बड़ा सवाल है। SIR के बाद पहले चरण में कुल मतदाताओं की संख्या 2021 से 18 लाख कम थी, फिर भी 93% रिकॉर्ड मतदान हुआ। SIR के बाद 27 लाख नाम हटाए गए लेकिन 3.35 करोड़ लोगों ने वोट डाला जो पिछली बार 3.15 करोड़ से ज़्यादा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आज़ादी के बाद अब तक का सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत रहा है। चुनाव आयोग इसे जागरूकता बता रहा है, विपक्ष इसे संदिग्ध बता रहा है।

राजनीतिक दलों का क्या कहना है?

BJP ने रिकॉर्ड वोटिंग को ममता बनर्जी की सरकार के अंत का संकेत बताया तो ममता बनर्जी ने कहा कि रिकॉर्ड वोटिंग से उनकी जीत पक्की है। विपक्ष का आरोप है कि SIR का असर खासतौर पर अल्पसंख्यक और वंचित समुदायों पर पड़ा है जिनसे सत्तारूढ़ पार्टी को नुकसान होने की आशंका है। 

4 मई को खुलेगा असली राज़

29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे। SIR से जिन लाखों लोगों के नाम कटे उनका गुस्सा वोटिंग मशीन में कैद है या नहीं , यह तो 4 मई को ही पता चलेगा। लेकिन एक बात तय है कि बंगाल का यह चुनाव सिर्फ TMC बनाम BJP का नहीं रहा ,यह लोकतंत्र में वोट के अधिकार की लड़ाई भी बन गया है।


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