खुशी आखिर है क्या? हर इंसान खुश रहना चाहता है, लेकिन अजीब बात यह है कि ज़्यादातर लोग पूरी ज़िंदगी खुशी की तलाश में भटकते रहते हैं और फिर भी हाथ खाली रह जाता है। कोई कहता है पैसे में खुशी है, कोई कहता है शोहरत में, कोई कहता है रिश्तों में। लेकिन जब यह सब मिल भी जाता है तो एक अजीब सा खालीपन फिर भी बना रहता है। तो सवाल यह है कि आखिर खुशी है कहाँ और उसका राज़ क्या है? Source-ai पैसा खुशी नहीं देता लेकिन गरीबी भी नहीं देती। यह सुनने में अजीब लगता है लेकिन सच यही है कि पैसा एक हद तक ज़रूरी है, उसके बाद उसका असर कम होने लगता है। दुनिया के सबसे अमीर लोगों की ज़िंदगी देखो नींद की गोलियाँ, अकेलापन, रिश्तों में दरारें। और दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास बहुत कम है लेकिन उनकी हँसी सबसे असली है। इसका मतलब यह नहीं कि पैसा बुरा है, इसका मतलब सिर्फ यह है कि पैसा खुशी का ज़रिया हो सकता है, मंज़िल नहीं। दूसरों से तुलना खुशी की सबसे बड़ी दुश्मन। आज के ज़माने में सोशल मीडिया ने एक बहुत बड़ी बीमारी दी है और वो है दूसरों से अपनी तुलना करना। हर कोई दूसरे की ज़िंदगी देखकर अपनी ज़िंदगी को कमज़ोर समझने...