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UNSC की गैर स्थायी सीट पर भारत की दावेदारी पर आया चीन का पहला बयान, जानिए क्या कहा


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC की 2028-29 अवधि के लिए अस्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की दावेदारी पर चीन ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार को नियमित प्रेस वार्ता में भारत की उम्मीदवारी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में केवल इतना कहा कि चीन ने इससे जुड़ी खबरों पर गौर किया है। उन्होंने ना तो भारत के समर्थन में कोई बात कही और ना ही विरोध जताया, जिससे यह बयान कूटनीतिक हलकों में एक फीकी लेकिन गौर करने लायक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

Source: Wikimedia 


शांति मिशन के नाम से शुरू हुआ अभियान

यह पूरा मामला चौदह जुलाई का है, जब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के आधिकारिक चुनाव अभियान की शुरुआत की। जयशंकर ने इस अभियान को शांति यानी SHANTI नाम दिया, जिसका पूरा मतलब है नियमों, विश्वास और सत्यनिष्ठा के जरिए समग्र प्रगति सुनिश्चित करना। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम केवल एक नारा नहीं बल्कि भारत की विदेश नीति की असली भावना है, जिसे भारत ने दुनिया की मदद करके बार बार साबित भी किया है।

आतंकवाद और AI पर जयशंकर की सीधी बात

अपने संबोधन में जयशंकर ने आतंकवाद पर बेहद सख्त लहजे में बात की। उन्होंने कहा कि बहुत लंबे समय तक दुनिया के प्रयास आतंकवाद के सिर्फ लक्षणों से निपटने तक सीमित रहे हैं, लेकिन जब तक आतंकवाद के वित्तीय और संसाधन आधार को कमजोर नहीं किया जाएगा, तब तक सीमित सफलता ही मिलती रहेगी। इसके अलावा उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी दुनिया के सामने एक विस्तृत खाका पेश किया और कहा कि तकनीक के फायदों को पूरी तरह साकार करते हुए उसके दुरुपयोग से बचाव भी उतना ही जरूरी है।

गुतारेस से मुलाकात और सुधार की मांग

न्यूयॉर्क पहुंचने से पहले जयशंकर कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान जैसे खाड़ी देशों के दौरे पर थे। न्यूयॉर्क में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस से भी मुलाकात की और उनके सामने मजबूती से यह तर्क रखा कि उन्नीस सौ पैंतालीस में बनी पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद अब इक्कीसवीं सदी की भू राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती। भारत का साफ कहना है कि सिर्फ अस्थायी सीटें बढ़ाने से सुधार अधूरा रहेगा, बल्कि स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार जरूरी है। इसके तुरंत बाद जयशंकर चौदह और पंद्रह जुलाई को ब्रुसेल्स में भारत यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भी शामिल हुए।

चुनाव कब और किससे मुकाबला

2028-29 के दो वर्षीय कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होने हैं। एशिया प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत का सीधा मुकाबला ताजिकिस्तान से होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि सभी सदस्य देश उसके पक्ष में मतदान करेंगे। भारत इससे पहले आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है, जिसमें सबसे हालिया कार्यकाल 2021-22 का था। उस कार्यकाल के दौरान भारत ने समुद्री सुरक्षा, शांति अभियानों में तकनीक के इस्तेमाल और आतंकवाद जैसे मुद्दों को एजेंडे में प्रमुखता से उठाया था।

चीन का रुख अब भी क्यों है अस्पष्ट

चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में शामिल है और उसके पास वीटो पावर भी है। अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश पहले ही सुधारों के बाद सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं, लेकिन चीन ने इस मामले में अब तक खुलकर कोई स्पष्ट रुख नहीं दिखाया है। फरवरी 2026 में चीन ने भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं को समझने और सम्मान देने की बात जरूर कही थी, लेकिन उसके बाद से भी उसका रवैया सतर्क और गोलमोल ही बना हुआ है। यही वजह है कि गुरुवार की उसकी यह ताजा प्रतिक्रिया भी विश्लेषकों को ज्यादा उत्साहित नहीं कर पाई।


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