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भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

 क्या है पूरा मामला

जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का जंतर मंतर पर चल रहा अनिश्चितकालीन अनशन अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए अदालत में एक जनहित याचिका दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

Source: socialmedia 


याचिका में क्या मांग की गई

यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है। इसमें अदालत से मांग की गई है कि केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि वांगचुक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में जबरन तरल आहार दिया जाए। याचिका में यह चिंता भी जताई गई है कि अगर उनकी हालत और बिगड़ी तो यह पूरे देश और दुनिया के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति होगी।

अनशन की अब तक की स्थिति

वांगचुक अठारह दिनों से जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के समर्थन में यह आंदोलन कर रहे हैं, जिसकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। आरोप है कि मई में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक अनशन के दौरान वांगचुक का वजन साढ़े आठ किलोग्राम तक घट चुका है और उनका ब्लड प्रेशर भी काफी नीचे दर्ज किया गया है।

सेहत को लेकर बढ़ती चिंता

पिछले कुछ दिनों में वांगचुक की कमजोर हालत की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं, जिनमें डॉक्टर बार बार उनकी जांच करते नजर आते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके का कहना है कि वांगचुक को अब चलने फिरने और खड़े होने तक में दिक्कत महसूस हो रही है। इस बीच कई बॉलीवुड सितारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उनकी सेहत को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है।

आगे क्या होगा

अदालत ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए इस पर तुरंत सुनवाई का फैसला लिया और केंद्र व दिल्ली सरकार के वकीलों को निर्देश लेकर पेश होने को कहा है। दोनों सरकारों के जवाब के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अदालत आगे क्या रुख अपनाती है। तब तक वांगचुक अपने फैसले पर अडिग नजर आ रहे हैं, जबकि हजारों समर्थक उनसे अनशन समाप्त करने की लगातार अपील कर रहे हैं।


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