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सिवान में छात्रों पर AK-47 से फायरिंग करने वाला जवान सस्पेंड, संबित पात्रा का दावा झूठा साबित

 नीट पेपर लीक के विरोध में पच्चीस जुलाई को बुलाए गए बिहार बंद के दौरान सिवान शहर में हालात बेहद हिंसक हो गए थे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी को हाथ में AK-47 राइफल लेकर प्रदर्शनकारी छात्रों की तरफ फायरिंग करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। अब पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए फायरिंग करने वाले जवान को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

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कौन है यह पुलिसकर्मी

सिवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने बताया कि फायरिंग करने वाले जवान की पहचान अभिषेक पटेल के तौर पर हुई है, जो विशेष जांच दल यानी SIT में तैनात थे। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अभिषेक पटेल ने पहले छात्रों की दिशा में एक गोली दागी, जिसके बाद आंदोलनकारी छात्र पीछे की तरफ भागते नजर आए।

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घटना वाले दिन क्या हुआ था

पुलिस के मुताबिक बंद के दौरान करीब पांच सौ से अधिक लोग जेपी चौक और अस्पताल मोड़ की तरफ से ईंट पत्थर फेंकते हुए और फायरिंग करते हुए थाने की तरफ बढ़ रहे थे। हालात बेकाबू होने पर पुलिस ने सरकारी संपत्ति और सुरक्षाबलों की सुरक्षा के लिए दो राउंड हवाई फायरिंग की। इस हिंसक झड़प में तीन प्रदर्शनकारी गोली लगने से घायल हुए, जिनका इलाज चल रहा है, जबकि सिवान के एसपी पूरन कुमार झा और नगर थाना इंस्पेक्टर अविनाश कुमार समेत तीस से अधिक पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए थे।

तेजस्वी यादव ने उठाए थे सवाल

घटना का वीडियो वायरल होते ही बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने सीधी फायरिंग की और AK-47 का इस्तेमाल किया। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

राहुल गांधी के आरोप को संबित पात्रा ने बताया था झूठा

इस पूरे विवाद में एक दिलचस्प राजनीतिक मोड़ भी आया। जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए, तो भाजपा सांसद संबित पात्रा मीडिया के सामने आए और राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए झूठा करार दिया। पात्रा ने कहा था कि पुलिस ने कभी भी आंदोलन कर रहे छात्रों पर राइफल से फायरिंग नहीं की और राहुल गांधी देश में डर व अव्यवस्था का माहौल बनाना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। हालांकि अब सिवान एसपी द्वारा खुद जवान के सस्पेंशन की पुष्टि किए जाने के बाद यह साफ हो गया कि फायरिंग वाकई हुई थी, जिससे संबित पात्रा का दावा गलत साबित हो गया।

पुलिस महकमे में भी नाराजगी की चर्चा

इस सस्पेंशन के आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। कुछ पुलिसकर्मियों के बीच इस फैसले को लेकर नाराजगी की भी चर्चा है, क्योंकि उनका मानना है कि जवान ने भीड़ के बेकाबू होने और खुद पुलिसबल पर हो रहे हमले के जवाब में यह कदम उठाया था।

फिलहाल क्या स्थिति है

पुलिस के मुताबिक इस पूरे मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें यह देखा जाएगा कि फायरिंग की जरूरत वाकई कितनी थी और नियमों का कितना पालन हुआ। सिवान हिंसा में अब तक पुलिस पचीस से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।


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