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फांसी की सजा के बावजूद डर नहीं, शेख हसीना बोलीं इसी साल जरूर लौटूंगी अपने वतन बांग्लादेश

 क्या कहा शेख हसीना ने

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने साफ ऐलान किया है कि वे इसी साल अपने देश बांग्लादेश लौटेंगी, भले ही उन्हें मौत की सजा का सामना ही क्यों न करना पड़े। एक इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि सजा का डर उन्हें अपने फैसले से पीछे नहीं हटा सकता। करीब दो साल पहले देश छोड़ने के बाद से वे भारत में रह रही हैं।

Source: wikimedia 


बाईस महीने बाद पहली बार आधिकारिक ऐलान

आवामी लीग प्रमुख का यह बयान बाईस महीने में पहली बार आया है, जिसने नई दिल्ली से लेकर ढाका तक सियासी हलचल मचा दी है। हसीना ने कहा कि उनकी जिंदगी में लंबे समय से निजी समय जैसी कोई चीज नहीं रही और उन्होंने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश की जनता के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने उन्नीस सौ पचहत्तर में अपने पूरे परिवार को खोने और उसके बाद वर्षों तक निर्वासन में रहने की पुरानी यादें भी साझा कीं।

कितने मुकदमे और कितनी सजा

शेख हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में छह सौ तिरसठ मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से चार सौ तिरपन मामले हत्या से जुड़े बताए जाते हैं। इसके अलावा उन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप भी हैं। अब तक पांच मामलों में उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है, जिनमें दो हजार चौबीस के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े मामले में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के तहत अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई है। हसीना के परिवार के कम से कम सात अन्य सदस्यों के खिलाफ भी केस दर्ज हैं।

फैसले को बताया राजनीति से प्रेरित

अपने इंटरव्यू में हसीना ने इस सजा को पूरी तरह गलत और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित करार दिया। उनका कहना है कि यह फैसला न्याय नहीं बल्कि उन्हें और उनकी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाए या जान से भी मारा जाए, तो भी वे अपने देश की उसी मिट्टी पर लौटना चाहती हैं जहां उनके माता पिता दफन हैं।

पार्टी पर दबाव और आगे की राह

गौरतलब है कि हसीना के भारत आने के बाद से आवामी लीग की गतिविधियां लगभग ठप पड़ गई हैं और बांग्लादेश में पार्टी पर प्रतिबंध भी लगा हुआ है। ऐसी अटकलें भी हैं कि हसीना पर पार्टी की कमान किसी और नेता को सौंपने का दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे भविष्य में उनके परिवार का पार्टी पर दबदबा कमजोर पड़ सकता है। ऐसे में उनकी स्वदेश वापसी की यह घोषणा बांग्लादेश की सियासत को नई दिशा दे सकती है, हालांकि उनके सामने कानूनी चुनौतियां बेहद गंभीर बनी हुई हैं।


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