डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल संप्रभुता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पर डाली गई एक पोस्ट को लेकर दावा किया जा रहा है कि वह भारत में ब्लॉक कर दी गई है, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और डिजिटल अधिकारों दोनों मोर्चों पर बहस का विषय बन गया है।
पेपर लीक विवाद से जुड़ी है पूरी पृष्ठभूमि
यह विवाद हाल ही में हुए नीट प्रवेश परीक्षा पेपर लीक मामले से जुड़ा है, जिसने लाखों छात्रों और उनके परिवारों में गहरा आक्रोश पैदा किया था। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की थी। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जंतर मंतर पर कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार का भरोसा दिया।
पीएम मोदी ने फेसबुक पर क्या शेयर किया था
इसी घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फेसबुक पर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रतिबद्धता दोहराई। यह संदेश उन लाखों युवाओं के लिए खासतौर पर अहम माना गया, जो लंबे समय से निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे थे।
बग्गा ने उठाए तीखे सवाल
विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की यह फेसबुक पोस्ट भारत में ब्लॉक कर दी गई है। उन्होंने एक्स पर इस मुद्दे को उठाते हुए फेसबुक और उसकी मूल कंपनी मेटा पर गंभीर सवाल खड़े किए। बग्गा ने पूछा कि एक विदेशी सोशल मीडिया कंपनी किस अधिकार के आधार पर भारत के प्रधानमंत्री की पोस्ट को देश के नागरिकों तक पहुंचने से रोक सकती है। उन्होंने इसे सामान्य तकनीकी गड़बड़ी मानने से इनकार करते हुए मेटा से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की, और अपने दावे के समर्थन में पीएम की मूल पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।
डिजिटल संप्रभुता पर छिड़ी बड़ी बहस
बग्गा का कहना है कि अगर किसी विदेशी कंपनी को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की पोस्ट सीमित करने का अधिकार मिल जाए, तो यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने मेटा से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि अगर पोस्ट पर कोई प्रतिबंध लगाया गया, तो वह किस कानूनी आदेश या नीति के आधार पर लगाया गया।
इसी बीच संसद में पेश हुआ नया विधेयक
इस पूरे विवाद के साथ साथ सरकार ने परीक्षा प्रणाली सुधारने की दिशा में भी कदम तेज कर दिए हैं। संसद में लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण संशोधन विधेयक 2026 पेश किया गया, जिसे मंत्री जितेंद्र सिंह ने शून्यकाल के दौरान सदन में रखा। इसका मकसद परीक्षाओं में धांधली, संगठित नकल और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
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