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आखिरकार झुकी सरकार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, PM मोदी को भेजी चिट्ठी

नीट यूजी परीक्षा विवाद और देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी सार्वजनिक की।

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इस्तीफे में क्या लिखा

अपनी चिट्ठी में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले चार दशक से अधिक समय से वे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं और उनका हमेशा से मानना रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है। उन्होंने बताया कि तीन मई को हुई नीट यूजी परीक्षा में गड़बड़ियों की शिकायतें आते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला सीबीआई को सौंपा, परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया और अगले साल से नीट को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित मोड में कराने की घोषणा भी कर दी थी।

बीस लाख छात्रों की बात की

प्रधान ने लिखा कि बीस लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष रूप से कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी, जिसके लिए इक्कीस जून को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई। सोलह जुलाई को घोषित नतीजों में गरीब और वंचित परिवारों के कई प्रतिभाशाली छात्रों को सफलता भी मिली, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा।

दस दिन का व्यथित मन

अपने इस्तीफे की सबसे अहम वजह बताते हुए प्रधान ने लिखा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद व्यथित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है, और वे नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव में उलझे या उनका ध्यान पढ़ाई से भटके। इसी भावना के साथ उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया। चिट्ठी के आखिर में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों कर्मचारियों का आभार जताया।

राहुल गांधी की मांग के बाद आया फैसला

गौरतलब है कि इस्तीफे से ठीक पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि पहले धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, तभी आगे की बातचीत हो सकती है। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि नरेंद्र मोदी अतीत हैं, वे भविष्य से नहीं लड़ सकते।

देशभर में जारी था प्रदर्शन

यह इस्तीफा ऐसे समय आया जब जंतर मंतर पर टॉलस्टॉय मार्ग के पास पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो चुकी थी और आंसू गैस के गोले तक छोड़े गए थे। कोलकाता में भी छात्रों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें आईं, वहीं पटना के गांधी मैदान में भी छात्रों के समर्थन में तेजस्वी यादव के भाई तेज प्रताप यादव सड़क पर उतरे। नागपुर के प्रदर्शन में एक नीट पीड़िता की मां भी पहुंची थीं और उन्होंने भी यही मांग रखी थी।


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