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दिल्ली पुलिस ने CJP के संसद मार्च को नहीं दी अनुमति, धारा 163 लागू, फिर भी जंतर मंतर पर उमड़े 20 हजार लोग

परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर पिछले तेईस दिनों से जंतर मंतर पर चल रहा आंदोलन आज बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने आज जंतर मंतर से संसद तक मार्च का ऐलान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि इस मार्च को कोई अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद रविवार रात तक जंतर मंतर और आसपास के इलाकों में करीब बीस हजार लोग जमा हो चुके थे।

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पुलिस ने क्यों नहीं दी अनुमति

दिल्ली पुलिस के मुताबिक CJP की तरफ से मार्च के लिए ना तो कोई औपचारिक आवेदन दिया गया और ना ही किसी तरह की स्वीकृति मांगी गई। पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा एक सौ तिरसठ लागू कर दी है, जो पुरानी सीआरपीसी की धारा एक सौ चवालीस जैसी ही है। इस धारा के तहत बिना अनुमति किसी भी तरह की रैली, जुलूस या पांच से ज्यादा लोगों के जमावड़े पर पूरी तरह रोक रहती है। पुलिस ने कहा है कि सिर्फ जंतर मंतर के तय प्रदर्शन स्थल पर ही पहले से अनुमति लेकर विरोध किया जा सकता है, उससे आगे कोई भी मार्च गैरकानूनी माना जाएगा।

छावनी में तब्दील हुआ इलाका

आशंकित हालात को देखते हुए दिल्ली पुलिस पूरी तरह हाई अलर्ट पर आ गई है। नई दिल्ली जिले को पंद्रह जोन में बांटकर पांच हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और पच्चीस से अधिक अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात की गई हैं। संसद भवन, इंडिया गेट और राष्ट्रपति भवन जैसे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। मौके पर वज्र वाहन और वाटर कैनन भी तैनात रखे गए हैं, जबकि मेट्रो स्टेशन और अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया है। रविवार शाम को पुलिस ने जंतर मंतर को सात बजे तक खाली करने का अल्टीमेटम भी दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारी देर रात तक धरना स्थल पर डटे रहे।

वांगचुक की जगह अब दिपके अनशन पर

इसी बीच आंदोलन में एक बड़ा मोड़ भी आया है। सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन अस्पताल ले जाए जाने के बाद अब CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने खुद आमरण अनशन शुरू कर दिया है। दिपके ने ऐलान किया कि अब उनकी मांग सिर्फ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब वे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी दौरान जंतर मंतर पर दिपके पर कुछ अज्ञात लोगों ने स्याही भी फेंकी, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

सेलिब्रिटी और नेताओं की मौजूदगी

आंदोलन को समर्थन देने अभिनेत्री शबाना आजमी और अभिनेता प्रकाश राज भी जंतर मंतर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता जताई। आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक साबित होगा और केंद्र सरकार को झुकना पड़ेगा। वहीं गोपाल राय ने वांगचुक को जबरन हटाए जाने की कड़ी आलोचना की।

वांगचुक की पत्नी ने रखी शर्त

वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और वहां भी अपना अनशन जारी रखे हुए हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने बताया कि अगर राजनीतिक नेता वांगचुक से मिलकर मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाते हैं, तो वे आज अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं। इससे पहले गीतांजलि ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पति को निजी अस्पताल शिफ्ट करने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी।

अब आगे क्या होगा

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि धारा एक सौ तिरसठ लागू होने और भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद हजारों की भीड़ संसद तक मार्च करने में कामयाब होती है या नहीं। साथ ही यह भी देखना अहम होगा कि क्या कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा वांगचुक से मिलकर उनका अनशन समाप्त करवा पाता है।


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