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वांगचुक अस्पताल में फिर भी नहीं रुकेगा कल का संसद कूच, केजरीवाल टिकैत डिंपल यादव सब पहुंचेंगे

 देश में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर पिछले एक महीने से जंतर मंतर पर चल रहा आंदोलन कल यानी सोमवार बीस जुलाई को अपने सबसे बड़े मोड़ पर पहुंचने वाला है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने ऐलान किया है कि मानसून सत्र के पहले दिन जंतर मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। खास बात यह है कि इस मार्च की अगुवाई करने वाले सोनम वांगचुक को शनिवार को ही दिल्ली पुलिस जबरन अस्पताल ले गई थी, बावजूद इसके CJP ने साफ कर दिया है कि मार्च तय समय पर ही होगा।

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क्यों निकाला जा रहा है यह मार्च

इस पूरे आंदोलन की जड़ में मई महीने में हुई परीक्षा पेपर लीक की घटनाएं हैं, जिनसे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ था। CJP की मुख्य मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और एक पारदर्शी व भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली लागू की जाए। पार्टी का कहना है कि परीक्षा में गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों को न्याय दिलाना भी इस मार्च का एक बड़ा मकसद है। सोनम वांगचुक ने खुद एक वीडियो संदेश में कहा था कि यह मुद्दा उठाने के लिए संसद ही सही मंच है, इसीलिए मार्च को सीधे संसद तक ले जाने का फैसला किया गया।

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जंतर मंतर से जबरन उठा ले गए सोनम वांगचुक को

वांगचुक की गैर मौजूदगी में भी जारी रहेगा आंदोलन

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक अट्ठाईस जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे और शनिवार सुबह उनकी बिगड़ती सेहत के चलते दिल्ली पुलिस उन्हें जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा था कि पुलिस ने सख्ती दिखाई और वांगचुक को जबरदस्ती हटाया गया। इसके बावजूद पार्टी ने ऐलान किया है कि आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा और मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार ही निकाला जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि वांगचुक की गैर मौजूदगी में भी हजारों की तादाद में छात्र और आम नागरिक जंतर मंतर पहुंचेंगे।

किन नेताओं ने दिया साथ का भरोसा

पिछले कुछ दिनों में इस आंदोलन को कई बड़े राजनीतिक चेहरों का समर्थन मिल चुका है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पहले ही जंतर मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात कर चुके हैं और उन्होंने कल के मार्च में शामिल होने का भरोसा दिया है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि किसानों के ट्रैक्टर और ट्रॉलियां तैयार हैं और कल जंतर मंतर पर जनसैलाब उमड़ेगा। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव, आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह, सांसद प्रकाश आंबेडकर और सीपीआई एम सांसद अमरा राम सहित कई नेताओं ने भी आंदोलन स्थल का दौरा कर अपनी भागीदारी की घोषणा कर दी है।

शिवसेना यूबीटी का महाराष्ट्र में समानांतर प्रदर्शन

शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा है कि जिस दिन CJP दिल्ली में संसद तक मार्च निकालेगी, उसी दिन शिवसेना यूबीटी महाराष्ट्र में समानांतर प्रदर्शन करेगी और पार्टी के सांसद मानसून सत्र के दौरान संसद के भीतर भी यह मुद्दा उठाएंगे। ठाकरे ने राहुल गांधी से भी अपील की है कि वे बिना किसी पार्टी झंडे के सिर्फ एक नागरिक के तौर पर इस आंदोलन में शामिल हों।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर टिकी निगाहें

हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब भी यही बना हुआ है कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव कल के मार्च में शामिल होंगे। खुद वांगचुक ने अपने एक वीडियो संदेश में दोनों नेताओं से सीधी अपील करते हुए कहा था कि अगर वे बीस जुलाई को नहीं आए तो यह ठीक नहीं होगा। अब तक दोनों बड़े नेताओं की तरफ से मार्च में शामिल होने की कोई औपचारिक पुष्टि नहीं आई है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा बनी हुई है।

शिक्षकों और आम नागरिकों की भागीदारी

नेताओं के अलावा इस आंदोलन को देशभर के शिक्षकों और अभिभावकों का भी लगातार समर्थन मिल रहा है। CJP ने शुरुआत से ही अपील की है कि यह आंदोलन किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का साझा मंच है। कई राज्यों से कोचिंग संस्थानों के शिक्षक और स्कूली अध्यापक जंतर मंतर पहुंचने की तैयारी में हैं, जो परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर छात्रों जितनी ही गंभीर चिंता जता रहे हैं। हालांकि किसी बड़े फिल्मी या खेल जगत के सेलिब्रिटी की आधिकारिक शिरकत को लेकर अभी तक कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

क्या रहेगा कल का माहौल

वांगचुक की हिरासत के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि कल का मार्च पहले से कहीं ज्यादा बड़ा और भावनात्मक होगा। पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाने की भी खबर है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे बड़े नेता वाकई मार्च में पहुंचते हैं, और सरकार की तरफ से छात्रों की मांगों पर कोई ठोस जवाब आता है या नहीं।


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