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जंतर मंतर पर उमड़े 20 हजार लोग,दिल्ली पुलिस ने CJP के संसद मार्च को नहीं दी अनुमति, धारा 163 लागू

आज सोमवार बीस जुलाई को दिल्ली का जंतर मंतर पूरे दिन देश की सबसे बड़ी सियासी हलचल का केंद्र बना रहा। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संसद मार्च, पुलिस की सख्ती, केंद्रीय मंत्री से बातचीत और प्रधानमंत्री के बयान तक, दिनभर एक के बाद एक बड़ी घटनाएं होती रहीं। शाम होते होते यह साफ हो गया कि यह आंदोलन सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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सुबह से जुटने लगी भारी भीड़

रविवार रात से ही जंतर मंतर पर लोगों का जमावड़ा बढ़ना शुरू हो गया था और सोमवार सुबह तक यह संख्या करीब बीस हजार तक पहुंच गई। दिल्ली पुलिस ने पहले ही साफ कर दिया था कि मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है और नई दिल्ली जिले में धारा एक सौ तिरसठ लागू है, जिसके तहत पांच से ज्यादा लोगों के जमावड़े पर रोक रहती है। इसके बावजूद पंद्रह जोन में बंटे इलाके में पांच हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और पच्चीस से अधिक अर्धसैनिक टुकड़ियों के बीच से होते हुए हजारों की भीड़ जंतर मंतर पर डटी रही।

पथराव और झड़प में सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल

दिन बढ़ने के साथ हालात तनावपूर्ण होते चले गए। कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प के दौरान पथराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिसमें एक सौ अठारह से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सत्तर से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इसी दौरान CJP प्रमुख अभिजीत दिपके को भी पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबरें तेजी से फैल गईं, जिससे सुबह से ही दिल्ली में भारी तनाव देखा गया। हालांकि बाद में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि यह खबरें पूरी तरह गलत थीं और दिपके पूरी तरह सुरक्षित हैं।

नड्डा से मुलाकात के बाद टूटा दिपके का अनशन

सबसे बड़ा घटनाक्रम तब हुआ जब खबर आई कि सरकार बातचीत के लिए तैयार हो गई है। CJP प्रतिनिधिमंडल के सदस्य आशुतोष रांका और सौरव दास ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के घर पर जाकर उनसे मुलाकात की, जो करीब दस मिनट तक चली। इस दौरान नेताओं ने अपनी मांगें मंत्री के सामने रखीं, जिस पर नड्डा ने आंतरिक बातचीत का आश्वासन दिया। बैठक के बाद सौरव दास ने कहा कि सरकार ने बातचीत की पहल की है और अब आगे का फैसला सरकार को करना है। इसी मुलाकात के बाद अभिजीत दिपके ने संसद मार्च में शामिल होने से पहले एक गिलास जूस पीकर अपना अनशन तोड़ दिया। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने बताया कि खुद वांगचुक ने ही दिपके से अनशन खत्म करने का आग्रह किया था ताकि उन्हें आंदोलन जारी रखने की ताकत मिल सके।

मोदी हटाओ देश बचाओ का नया नारा

बातचीत के बावजूद CJP का रुख नरम नहीं पड़ा। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर मोदी हटाओ देश बचाओ का नया और तीखा नारा पोस्ट कर राजनीतिक पारा और चढ़ा दिया। सौरव दास ने साफ कहा कि अगर मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा, वहीं आशुतोष रांका ने कहा कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा।

सेलिब्रिटी और नेताओं की मौजूदगी

आंदोलन को समर्थन देने के लिए अभिनेत्री शबाना आजमी और अभिनेता प्रकाश राज जंतर मंतर पहुंचे। प्रकाश राज रात के अंधेरे में भी प्रदर्शन कर रहे बच्चों और युवाओं की भीड़ देखकर काफी प्रभावित नजर आए और उन्होंने कहा कि ये सभी यंगस्टर्स अहम सवाल उठा रहे हैं। शबाना आजमी खुद अभिजीत दिपके से मिलीं और आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई। इसके अलावा आजाद समाज पार्टी कांशीराम के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद भी CJP के मंच पर पहुंचे। समाजवादी पार्टी सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि आज सबका ध्यान उसी विरोध प्रदर्शन पर होना चाहिए जिसका लंबे समय से इंतजार था।

एक साथ चले तीन बड़े प्रदर्शन

दिलचस्प बात यह रही कि सोमवार को दिल्ली में सिर्फ CJP का ही नहीं बल्कि तीन बड़े विरोध प्रदर्शन एक साथ चले। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थी, जबकि किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी भारत अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। इन तीनों प्रदर्शनों के चलते दिल्ली पुलिस के लिए सुरक्षा व्यवस्था संभालना बड़ी चुनौती बन गया।

संसद में हंगामा और पीएम मोदी का बयान

संसद भवन के भीतर भी इसका सीधा असर देखने को मिला। मानसून सत्र के पहले ही दिन नीट पेपर लीक के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया, जिसके चलते अध्यक्ष ओम बिरला को दिन भर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। अब दोनों सदनों की कार्यवाही इक्कीस जुलाई सुबह ग्यारह बजे फिर शुरू होगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि जहां तथ्य और तर्क होते हैं, वहां तूफान की कोई गुंजाइश नहीं होती। उन्होंने विपक्ष से सकारात्मक रवैया अपनाने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की अपील की, साथ ही भारत की आर्थिक मजबूती और पश्चिम एशिया में जारी तनाव से ऊर्जा आयात को लेकर पैदा हो रही चुनौतियों का भी जिक्र किया।

क्या सरकार पर बना दबाव

दिनभर के घटनाक्रम को देखें तो यह साफ है कि CJP का आंदोलन सरकार को बातचीत की मेज तक लाने में कामयाब जरूर रहा, क्योंकि खुद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को कार्यकर्ताओं से मिलना पड़ा। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक किसी ठोस मांग पर सहमति की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, और मोदी हटाओ जैसे नारों के बाद भी CJP का रुख नरम होता नहीं दिख रहा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत किसी ठोस नतीजे तक पहुंचती है या यह टकराव और बढ़ता है।


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