मीडिया रिपोर्ट पर सीजेआई सूर्यकांत की सफाई, कहा गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग हुई, जरूरत पड़ी तो दखल दूंगा
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने संसद चलो मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका को सुनने से इनकार कर दिया था। सीजेआई ने कहा कि यह पूरी तरह गलत और गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर आधारित है।
क्या कहा सीजेआई ने
सीजेआई सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि पिछले दो दिनों में यह पूरी तरह गलत बताया गया कि कोई मामला दायर किया गया था। उन्होंने कहा कि सुबह दस बजे तक एक भी याचिका दायर नहीं हुई थी, बल्कि यह सिर्फ एक पत्र या अभ्यावेदन था। उन्होंने सीधा सवाल किया कि वे उस पत्र को रिट याचिका कैसे मान सकते हैं। सीजेआई ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद रजिस्ट्री से इसकी स्थिति की पुष्टि की थी, और मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने इसका जिक्र किया था, लेकिन मीडिया ने बिना सोचे समझे यह रिपोर्ट कर दिया कि उन्होंने मामला सुनने से इनकार कर दिया।
पत्र में क्या मांग की गई थी
वकील नरेंद्र मिश्रा ने सीजेआई को लिखे पत्र में संविधान के अनुच्छेद बत्तीस के तहत सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। इसमें नीट यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध के दौरान मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। पत्र में सादे कपड़ों में आए लोगों द्वारा हमले की जांच और ड्रोन फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने की मांग भी की गई थी।
इससे पहले क्या हुआ था
इसी हफ्ते की शुरुआत में जब वकील ने तत्काल सुनवाई की मांग की थी, तब सीजेआई की बेंच ने कहा था कि कृपया हमारा और अपना समय बर्बाद ना करें। न्यायमूर्ति बागची और न्यायमूर्ति मोहन वाली बेंच ने वीडियो देखने से भी इनकार करते हुए कहा था कि उन्हें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है और उनके पास उन्हें देखने का समय नहीं है।
मेट्रो स्टेशन बंदी पर भी सख्त हुए सीजेआई
इसी दौरान एक अलग मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने प्रदर्शन के चलते बंद किए गए सोलह मेट्रो स्टेशनों को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने अदालत में बताया कि मेट्रो बंद होने से वकीलों और अदालत के कर्मचारियों को कोर्ट पहुंचने में भारी दिक्कत हो रही है। इस पर सीजेआई ने कहा कि उन्होंने सुबह ही सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को सूचित कर दिया है और दोपहर तक अगर समाधान नहीं निकला तो जरूरत पड़ने पर वे खुद दखल देंगे। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इस स्थिति के चलते जो वकील समय पर पेश नहीं हो पाएं, उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित ना किया जाए।
सरकार का रुख भी सामने आया
इस बीच केंद्र सरकार ने छात्रों को न्याय दिलाने का भरोसा दोहराया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की और प्रदर्शनकारी छात्रों की चिंताओं पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। सरकार ने संसद में पेपर लीक और परीक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा कराने की बात कही है, साथ ही बीस जुलाई को शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज ना करने पर भी सकारात्मक रुख अपनाया है। जिन छात्रों की कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हुई, उनके परिवारों को उचित मुआवजा देने पर भी विचार किया जा रहा है।
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