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जीत तो मिल गई, अब आगे क्या करेगी CJP, चुनाव लड़ने पर दिपके ने पहले ही दे दिया था जवाब
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का जंतर मंतर आंदोलन एक बड़ी जीत के साथ खत्म हो चुका है। लेकिन अब देशभर में एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या CJP सिर्फ एक आंदोलन तक सीमित रहेगी, या अब यह संगठन एक स्थायी राजनीतिक ताकत बनने की तरफ बढ़ेगा। इस सवाल का जवाब खुद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलन खत्म होने से पहले ही कई इंटरव्यू में दे दिया था।
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| Source: wikimedia |
क्या चुनाव लड़ेगी CJP
आंदोलन के दौरान ही एक इंटरव्यू में जब दिपके से सीधा सवाल पूछा गया कि क्या CJP आगामी चुनावों में हिस्सा लेगी, तो उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य छात्रों और युवाओं के मुद्दों को उठाना है, ना कि चुनाव लड़ना। उन्होंने इसे एक तीखे सवाल के साथ समझाया कि अगर इस देश में अपने अधिकारों की मांग करने के लिए हर किसी को चुनाव लड़ना पड़े, तो फिर व्यवस्था कैसे चलेगी। इस जवाब से साफ है कि फिलहाल पार्टी खुद को एक दबाव समूह या जन आंदोलन के तौर पर ही देखती है, चुनावी राजनीति में सीधे उतरने का उनका कोई तात्कालिक इरादा नहीं दिखता।
पीएम मोदी को लेकर दिपके की नाराजगी
इसी इंटरव्यू में दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री दुनिया में कहीं भी कोई घटना होने पर ट्वीट करते हैं, लेकिन देश के छात्र आत्महत्या कर रहे हैं और उनकी ओर से एक शोक संदेश तक नहीं आया। उन्होंने कहा कि मन की बात और परीक्षा पे चर्चा की बात करने से पहले छात्रों की मन की बात भी सुननी चाहिए। दिपके का मानना था कि अगर प्रधानमंत्री सीधे छात्रों से संवाद करें, तो उन्हें उनकी वास्तविक समस्याओं का बेहतर अंदाजा होगा।
आंदोलन का असली मकसद क्या रहा
एक अन्य इंटरव्यू में दिपके ने अपने आंदोलन की दिशा, किसानों के मुद्दे, सोनम वांगचुक के समर्थन, लद्दाख और राजनीतिक आरोपों पर भी विस्तार से बात की थी। उन्होंने तब भी दोहराया था कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान छात्रों के मुद्दे पर है और इसी को लेकर आंदोलन आगे बढ़ेगा। जब उनसे पूछा गया था कि अगर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती तो आगे क्या करेंगे, तो उन्होंने तीखे लहजे में जवाब दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान आखिर किस चीज में दिलचस्पी रखते हैं, पेपर लीक कराने में या बच्चों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने में।
विपक्षी दलों से दूरी बनाए रखने की कोशिश
आंदोलन के दौरान जब विपक्षी दलों के समर्थन पर सवाल पूछा गया, तो दिपके ने साफ किया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर सिर्फ छात्रों का साथ दिया गया है। यह बयान बताता है कि CJP जानबूझकर खुद को किसी एक राजनीतिक खेमे से जोड़े जाने से बचाना चाहती है, भले ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने आंदोलन को खुला समर्थन दिया हो।
अभी भी दो मांगें बाकी, इसलिए पूरी तरह भंग नहीं होगा संगठन
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी दिपके ने साफ कर दिया है कि छात्रों की मौत पर मुआवजा और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई जैसी दो मांगें अभी बाकी हैं। इसका मतलब है कि CJP संगठन के तौर पर भंग नहीं होगा, बल्कि जंतर मंतर का स्थायी धरना खत्म करके अब बातचीत और दबाव की रणनीति अपनाएगा। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने पहले ही कहा है कि जब भी सरकार बातचीत के लिए बुलाएगी, वे उपस्थित रहेंगे।
आगे की राह में क्या चुनौतियां हैं
CJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही रहेगी कि आंदोलन की धार खत्म होने के बाद भी वह अपनी प्रासंगिकता कैसे बनाए रखे। बिना किसी चुनावी महत्वाकांक्षा के, सिर्फ मुद्दा आधारित दबाव समूह के तौर पर लंबे समय तक जनता का ध्यान खींचना आसान नहीं होता। हालांकि इस आंदोलन ने दिपके और उनकी टीम को राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान जरूर दी है, और अगर भविष्य में कोई और बड़ा छात्र या युवा केंद्रित मुद्दा उठता है, तो CJP की भूमिका फिर से अहम हो सकती है।
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