क्या है पूरा मामला
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की गैर मौजूदगी को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त सस्पेंस बना हुआ है। बीते करीब बीस दिनों से राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, ना ही उनकी कोई तस्वीर सामने आई है और ना ही उनके शेड्यूल को लेकर कोई साफ जानकारी दी गई है। इसी बीच जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी उन पर तंज कस दिया है।
छात्रों की गूंज अभियान अचानक क्यों रुका
राहुल गांधी ने सत्रह जून को छात्रों की गूंज नाम से एक बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था। इस अभियान के जरिए वे शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों को मुद्दा बना रहे थे। लेकिन अभियान शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद यह अचानक ठप पड़ गया। इसकी वजह से पहले से तय प्रयागराज का कार्यक्रम टालना पड़ा और उसके बाद पटना का बड़ा आयोजन भी रद्द करना पड़ा। कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता और रणनीतिकार भी अपने ही नेता की इस लंबी चुप्पी से हैरान हैं।
नेता प्रतिपक्ष की जवाबदेही पर उठे सवाल
राहुल गांधी फिलहाल नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर हैं, जिसे कैबिनेट मंत्री के बराबर दर्जा प्राप्त होता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने अहम पद पर बैठा नेता आखिर बिना किसी सूचना के इतने लंबे समय तक कहां और क्यों गायब रहा। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि वे विदेश यात्रा पर हैं, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
सोनम वांगचुक ने क्यों कसा तंज
दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के तहत अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत भी लगातार बिगड़ती जा रही है। पंद्रह दिन की भूख हड़ताल के बाद उनका करीब आठ किलो वजन घट चुका है। इसी बीच वांगचुक ने राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव से बीस जुलाई को होने वाले संसद मार्च में शामिल होने की अपील की और साफ कहा कि अगर वे उस दिन नहीं आए तो यह ठीक नहीं होगा। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि किसी और में हीरो मत ढूंढिए, अपनी जिंदगी के हीरो खुद बनिए।
उद्धव ठाकरे ने भी लगाई गुहार
शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी राहुल गांधी से अपील की है कि वे जंतर मंतर जाकर छात्रों के इस आंदोलन में शामिल हों। उन्होंने कहा कि अगर देश के युवाओं की चिंता है तो सभी राजनीतिक दलों को इस प्रदर्शन के समर्थन में आगे आना चाहिए। ठाकरे ने खुद बीस जुलाई को दिल्ली जाकर आंदोलन में शामिल होने की बात कही है। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी, टीएमसी और वाम दलों के कई नेता पहले ही इस आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसका समर्थन नहीं किया है।
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