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Muhammad Ali jauhar university ko gira diya jayega!

 उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और फिलहाल जेल में बंद आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट कही जाने वाली मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। रामपुर विकास प्राधिकरण यानी RDA ने यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें गिराने का आदेश जारी कर दिया है। नियम के मुताबिक ट्रस्ट को पहले 15 दिन का समय दिया जाएगा ताकि वह खुद ही अवैध निर्माण हटा सके।

Source:wikimedia 


किसने और क्यों बनवाई थी यह यूनिवर्सिटी

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का गठन साल 2003 में हुआ था। 18 सितंबर 2005 को उस वक्त के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी थी। इसके बाद कई सालों तक निर्माण कार्य चलता रहा और करीब 2012 में इसका औपचारिक उद्घाटन हुआ। करीब 1500 बीघा यानी लगभग 250 एकड़ में फैला यह परिसर उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े निजी शैक्षणिक परिसरों में गिना जाता है, जिसमें मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग, शिक्षा, कृषि, लाइब्रेरी और हॉस्टल जैसी कई बड़ी बिल्डिंगें बनाई गई थीं। निर्माण पर करीब 496 करोड़ रुपए खर्च होने की बात सामने आई है।

40 में से सिर्फ 38 भवन ही क्यों गिराए जाएंगे

यह सवाल कई लोगों के मन में आ रहा है कि जब यूनिवर्सिटी परिसर में कुल 40 भवन बने हैं, तो फिर सिर्फ 38 पर ही बुलडोजर क्यों चलेगा। इसका जवाब खुद प्रशासन की जांच में छिपा है। साल 2024 में यह इलाका RDA के अधिकार क्षेत्र में आया, जिसके बाद प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी से सभी भवनों के स्वीकृत मानचित्र मांगे थे। जांच में सामने आया कि कुल चालीस भवनों में से केवल दो भवनों का ही नक्शा प्राधिकरण से स्वीकृत था, बाकी अड़तीस भवन बिना मंजूरी के ही खड़े कर दिए गए थे। यही वजह है कि सिर्फ वही दो भवन इस ध्वस्तीकरण के दायरे से बाहर रखे गए हैं, क्योंकि कानूनी तौर पर सिर्फ वही भवन नियमों के मुताबिक बने पाए गए।

प्रशासन ने क्या प्रक्रिया अपनाई

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के मुताबिक अठाईस जून को RDA ने बिना मानचित्र स्वीकृति के बने 38 भवनों को लेकर नोटिस जारी कर यूनिवर्सिटी प्रबंधन से पंद्रह दिन के भीतर जवाब मांगा था। समयसीमा पूरी होने के बाद संस्थान को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि यह भवन तय नियमों के तहत स्वीकृत नहीं थे। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम उन्नीस सौ तिहत्तर की धारा सत्ताईस की उपधारा एक के तहत ध्वस्तीकरण का यह आदेश पारित किया गया।

राजनीतिक हलकों में उठे सवाल

प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई सुनवाई, दस्तावेजों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की गई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे आजम खान के खिलाफ एक सुनियोजित कार्रवाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यूनिवर्सिटी की तरफ से तंजीन फातिमा ने भी इस मामले में हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है।

करीब ढाई हजार छात्रों का भविष्य अधर में

इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ी चिंता यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे करीब ढाई हजार छात्रों को लेकर है। अगर तय समय सीमा के भीतर ट्रस्ट खुद निर्माण नहीं हटाता और मामला अदालत में भी उसके पक्ष में नहीं जाता, तो आने वाले दिनों में इन छात्रों की पढ़ाई, परीक्षा और डिग्री को लेकर बड़ी अनिश्चितता खड़ी हो सकती है।


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