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लाठीचार्ज के वीडियो देखने से CJI ने किया इनकार, कहा हमारा समय बर्बाद मत करिए

 नीट पेपर लीक और CJP के जंतर मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां भी याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले की तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया और वीडियो सबूत देखने तक से मना कर दिया।

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अदालत में क्या हुआ

मामले का उल्लेख करते हुए वकील नरेंद्र कुमार मिश्रा ने बेंच से कहा कि यह मामला नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों से जुड़ा है और पुलिस कार्रवाई को लेकर तत्काल सुनवाई की जरूरत है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कहा कि उन्हें इस केस में कोई रुचि नहीं है। जब वकील ने जोर देकर बताया कि उनके पास पुलिस की कथित ज्यादती और निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के कई वीडियो फुटेज मौजूद हैं और उन्हें अदालत में पेश करने की पेशकश की, तो सीजेआई ने वह पेशकश स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया और कहा कि हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।

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कैसे हुई थी घटना

सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हजारों की भीड़ जंतर मंतर से संसद तक मार्च करने की योजना बना रही थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने बीच में ही बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। इसी घटना के अगले दिन मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।

वकीलों के संगठन ने भी जताई नाराजगी

सिर्फ याचिकाकर्ता ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी इस लाठीचार्ज को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। एसोसिएशन ने अपने बयान में इसे बहुत ज्यादा और बेहिसाब बल प्रयोग बताते हुए इसकी निंदा की और अधिकारियों से मांग की कि सभी घायल छात्रों और लीगल ग्रुप के सदस्यों को सही चिकित्सा सुविधा दी जाए। बार एसोसिएशन ने भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा ना हों, इसके लिए जरूरी कदम उठाने की भी अपील की।

CJP प्रमुख की तीखी प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर देश के मुख्य न्यायाधीश भी ऐसे गंभीर मामलों को सुनने के लिए तैयार नहीं होंगे, तो यह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। CJP और विपक्षी नेताओं की मांग है कि पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो और अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी पहले जताई थी यही असहमति

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट से एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी इसी मुद्दे पर एक समान याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने भी तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए टिप्पणी की थी कि इस मामले में अदालत को मत घसीटिए। हालांकि इसी दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में सोनम वांगचुक को तुरंत मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का आदेश जरूर दिया था।

सरकार की तरफ से अब तक चुप्पी

इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट या केंद्र सरकार की तरफ से CJP की आलोचना पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आगे कोई तारीख तय नहीं हुई है।


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