एक के बाद एक दो जोरदार झटके
वेनेज़ुएला में बुधवार की शाम जो हुआ उसे याद करके लोग अब भी सहम जाते हैं। पहले 7.2 तीव्रता का भूकंप आया और उसके चंद सेकंड बाद ही 7.5 तीव्रता का दूसरा झटका भी आ गया। राजधानी काराकस से लेकर ला गुएरा तक हर जगह इमारतें हिलने लगीं, कई तो पूरी तरह जमींदोज़ हो गईं। लोगों को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला, हर तरफ बस चीख पुकार और धूल का गुबार था।
दीवारें चटकीं, बाहर निकलना मुश्किल हुआ
काराकस में रहने वाली मारिया अलेजांद्रा ने बताया कि वो अपने घर के अंदर ही थीं जब झटके शुरू हुए। दीवारें चटकने लगीं और खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया था। किसी तरह जल्दी से कपड़े पहने और दरवाज़ा खोलकर बाहर भागने की कोशिश की। बाहर का नज़ारा देखकर उन्हें लगा जैसे किसी डरावनी फिल्म का सीन चल रहा हो, हर तरफ मलबा फैला था और लोग उसी मलबे को पार करते हुए अपनी जान बचाने में लगे थे।
फोन पर अलर्ट आया, फिर शुरू हुई दहशत
25 साल के लुइस अलेजांद्रो रुइज गार्सिया का अनुभव भी कुछ कम डरावना नहीं था। उनके फोन पर भूकंप का अलर्ट आया और कुछ ही पलों बाद घर हिलने लगा। डर के मारे उनकी मां और बहन बिस्तर से उठ खड़ी हुईं और तीनों एक दूसरे को थामे हुए जल्दी से सीढ़ियां उतरकर बाहर निकले। बाहर आते ही पता चला कि पास की एक इमारत गिर गई है और उससे उठी धूल पूरे इलाके में फैली हुई थी।
एक मिनट जो सदियों जैसा लगा
38 साल के इंजीनियर जीसस अलेजांद्रो पीना उस वक्त एक सात मंज़िला इमारत की सबसे ऊपरी मंज़िल पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि झटके इतने तेज़ थे कि उन्हें ठीक से अंदाज़ा भी नहीं लगा कितनी देर तक चले, लेकिन ऐसा महसूस हुआ जैसे एक पूरा मिनट गुज़र गया हो। उनके मुताबिक यह उनकी ज़िंदगी का सबसे डरावना पल था।
30 आफ़्टर शॉक्स ने बढ़ाई मुसीबत
मुख्य भूकंप थमने के बाद भी मुसीबत खत्म नहीं हुई। वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने जानकारी दी कि अब तक करीब 30 आफ़्टर शॉक्स महसूस किए जा चुके हैं। यही वजह रही कि गृह मंत्री ने आम लोगों से अपील की कि जब तक हर इमारत की मजबूती की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक कोई भी अपने घर के अंदर वापस न जाए और खुले आसमान के नीचे ही रहे।
छुट्टी का दिन बना मुसीबत की वजह
इस हादसे की एक बड़ी वजह यह भी रही कि बुधवार को वेनेज़ुएला में राष्ट्रीय अवकाश था, जिसकी वजह से ज्यादातर लोग उस वक्त अपने घरों में ही मौजूद थे। देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी ऐसे इलाकों में रहती है जहां भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है, और बहुत से मकान इतने मजबूत नहीं बनाए गए कि इतने जोरदार झटके झेल सकें। यही कारण रहा कि नुकसान का दायरा इतना ज्यादा बढ़ गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी
रेस्क्यू टीमें दिन रात मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हुई हैं। कुछ जगहों पर ऐसे बुज़ुर्ग भी मलबे में फंसे मिले जिनके बच्चे देश की खराब आर्थिक हालत की वजह से पहले ही बाहर जा चुके थे। दुनिया के कई देशों ने मदद का हाथ बढ़ाया है और अमेरिका समेत कई जगहों से रेस्क्यू टीमें वेनेज़ुएला पहुंच रही हैं ताकि जितनी जल्दी हो सके मलबे में फंसे लोगों को बचाया जा सके।
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