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अमेरिका ने मार दिए तीन भारतीय नाविक मोदी चुप, देश में फूटा गुस्सा!

 तीन दिन, तीन हमले, तीन भारतीय की मौत

8 जून 2026 से लेकर 11 जून तक अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में तीन अलग-अलग व्यापारिक जहाज़ों पर हमले किए। तीनों जहाज़ों पर भारतीय नाविक सवार थे।

8 जून को MT Marivex पर हमला हुआ जिसमें 24 भारतीय सवार थे सभी बचाए गए। 10 जून को MT Settebello पर हमला हुआ जिसमें 24 भारतीय सवार थे तीन की मौत हो गई और 21 बचाए गए। 11 जून को Jalveer पर हमला हुआ जिसमें 20 भारतीय सवार थे सभी सुरक्षित निकाले गए।

अमेरिकी सेना के Central Command यानी CENTCOM ने तीनों हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह जहाज़ Iran की तेल blockade का उल्लंघन कर रहे थे। MT Settebello पर हमले के बारे में CENTCOM ने कहा कि जहाज़ के crew ने बार-बार अमेरिकी बलों के निर्देशों का पालन करने से इनकार किया इसलिए अमेरिकी विमान ने जहाज़ के engine room पर precision munitions यानी निशाना साध कर हमला किया। इसी हमले में आग लगी और तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई।

तीन भारतीय नाविक जिनके घर अब उजड़ गए

MT Settebello पर 24 में से 21 नाविक बच गए लेकिन तीन नाविकों के शव बाद में मिले और उनकी पहचान हो गई। यह तीनों भारत के अलग-अलग राज्यों से थे। केरल जो भारत में सबसे ज़्यादा नाविक देता है वहाँ के घरों में मातम छा गया। भारत में 3 लाख 20 हज़ार से ज़्यादा नाविक हैं जो दुनियाभर के जहाज़ों पर काम करते हैं। Philippines के बाद भारत में ही सबसे ज़्यादा नाविक हैं। यह लोग देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाते हैं, अपने परिवारों को पालते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ हैं।

मोदी की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल

तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद पूरे देश की नज़रें PM मोदी पर थीं। लेकिन मोदी ने एक शब्द नहीं बोला। एक fact checker ने लिखा "मैंने PM मोदी का X timeline देखा। वहाँ अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीयों के लिए न कोई संवेदना है, न कोई दुख का एक शब्द। उनके timeline पर सिर्फ विदेशी नेताओं के भारत के सबसे लंबे कार्यकाल PM बनने पर बधाई संदेशों के जवाब हैं।" यह तस्वीर बहुत कुछ कह देती है।

Iran ने दी संवेदनाएं अमेरिका के खिलाफ बोला

एक बेहद अजीब और शर्मनाक बात यह हुई कि जो काम भारत सरकार को करना चाहिए था वो Iran ने किया। Iran के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baquaei ने अमेरिका का नाम लेकर तीनों भारतीय नाविकों की मौत पर संवेदनाएं व्यक्त कीं। यानी जिस देश पर हमले की वजह से यह जहाज़ निशाना बना, उसी देश ने भारतीय नाविकों की मौत पर खुलकर दुख जताया। और जिस देश के नाविक मारे गए उस देश के PM ने एक शब्द नहीं कहा।

भारत सरकार का रुख "कड़ा विरोध" लेकिन नाम नहीं

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अमेरिका के Chargé d'Affaires को बुलाकर "कड़ा विरोध" दर्ज कराया है। Shipping Minister Sarbananda Sonowal ने कहा "यह हमारे maritime परिवार के लिए गहरी क्षति है।" लेकिन न तो विदेश मंत्री S. Jaishankar ने, न रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने और न ही PM मोदी ने अमेरिका की निंदा की। सरकार ने सिर्फ "विरोध" दर्ज कराया वो भी बिना यह साफ कहे कि यह हमले गलत थे।

Trade Unions का फूटा गुस्सा "जोर से बोलो सरकार"

Centre of Indian Trade Unions ने एक बयान जारी करके कहा "जब कोई विदेशी सेना अंतरराष्ट्रीय जल में भारतीय मज़दूरों को मार दे तो भारत सरकार को ज़ोर से और दृढ़ता से बोलना चाहिए।" All India Seafarers Union ने भी चिंता जताई लेकिन अमेरिका का नाम लेने से परहेज़ किया। मज़दूर संगठनों का कहना है कि अगर तीन अमेरिकी नाविक किसी विदेशी हमले में मारे जाते तो अमेरिका में 24 घंटे राजनीतिक तूफान मचा होता। लेकिन भारत में तीन नाविक मारे गए और सरकार खामोश है।

G7 में मिलेंगे Modi और Trump तब क्या होगा?

15 से 17 जून को France के Evian-les-Bains में G7 summit है। PM मोदी वहाँ जाएंगे और Trump से bilateral meeting की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत इस मुद्दे को G7 में उठाएगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या मोदी Trump के सामने खुलकर यह कह पाएंगे कि अमेरिकी हमले में भारतीय नाविक मारे गए और यह गलत था? या फिर diplomatic भाषा में बात होगी और असली सवाल दब जाएगा?

विपक्ष का हमला "Modi का Trump-प्रेम भारी पड़ रहा है"

Congress ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह मोदी की विदेश नीति की सबसे बड़ी विफलता है। Rahul Gandhi ने पहले भी मोदी को "Compromised PM" कहा था। अब Congress का कहना है कि Trump के साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश में मोदी ने अपने ही देश के नागरिकों की मौत पर चुप्पी साध ली। यह चुप्पी एक जवाब है लेकिन वो जवाब नहीं जो तीन मरे हुए नाविकों के परिवार सुनना चाहते थे।

तीन नाविकों का सवाल जवाब कौन देगा?

जब कोई भारतीय नाविक दुनिया के किसी कोने में जहाज़ पर काम करने जाता है तो उसे भरोसा होता है कि उसका देश उसके पीछे है। 10 जून 2026 को उस भरोसे की परीक्षा हुई। अमेरिका ने हमला किया। जहाज़ में आग लगी। तीन नाविक मारे गए। और देश के PM ने एक शब्द नहीं बोला। यह सिर्फ तीन मौतों की खबर नहीं है यह इस सवाल की खबर है कि क्या भारत सरकार अपने नागरिकों की रक्षा के लिए किसी ताकतवर दोस्त को भी "नहीं" कह सकती है?


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