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TMC में बगावत! सायोनी घोष से यूसुफ पठान तक, क्यों चर्चा में हैं 19 सांसद?

 TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, सामने आई 19 सांसदों की सूची

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। हाल ही में सामने आई एक सूची ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस सूची में सायोनी घोष, यूसुफ पठान, माला रॉय और कई अन्य सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने पार्टी नेतृत्व से अलग रुख अपनाया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अलग गुट के रूप में पहचान की मांग की है।
Source: sociamedia

सायोनी घोष का नाम सामने आने से बढ़ी चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा सायोनी घोष के नाम को लेकर हो रही है। वजह यह है कि सायोनी घोष को लंबे समय से पार्टी नेतृत्व और विशेष रूप से अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनका नाम बागी सांसदों की सूची में सामने आने से राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं।

यूसुफ पठान की मौजूदगी ने भी खींचा ध्यान

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान का नाम भी इस सूची में शामिल बताया जा रहा है। राजनीति में अपेक्षाकृत नए चेहरे माने जाने वाले यूसुफ पठान का इस तरह के घटनाक्रम से जुड़ना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि असंतोष केवल पुराने नेताओं तक सीमित नहीं है।

क्या TMC में बड़ी टूट की आहट है?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद अलग रुख अपनाते हैं तो इसका असर केवल पार्टी संगठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद की राजनीति और पश्चिम बंगाल के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि इस घटनाक्रम को TMC के इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक माना जा रहा है।

दूसरी ओर ममता बनर्जी के समर्थन में भी नेता

हालांकि पार्टी के भीतर असंतोष की खबरों के बीच कुछ बड़े नेताओं ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है। अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कहा है कि ममता बनर्जी ही उनकी नेता हैं और वे किसी बागी गुट का हिस्सा नहीं हैं। इससे साफ है कि पार्टी के भीतर स्थिति अभी पूरी तरह एकतरफा नहीं हुई है।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है सियासी हलचल

फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि बागी सांसद आगे क्या कदम उठाते हैं और पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का जवाब किस तरह देता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले ही कई बड़े बदलाव देख चुकी है और अब TMC के भीतर पैदा हुआ यह संकट आने वाले दिनों में नई राजनीतिक कहानी लिख सकता है।


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