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24 जून 2006, जब फिलीपींस ने हमेशा के लिए खत्म कर दी मृत्युदंड की सजा

Philippines 

इतिहास में 24 जून की तारीख फिलीपींस के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आई थी। साल 2006 में आज ही के दिन तब की राष्ट्रपति ग्लोरिया मैकापागल अरोयो ने एक कानून पर दस्तखत किए, जिसने देश से मृत्युदंड यानी फांसी की सजा को पूरी तरह खत्म कर दिया। यह फैसला सिर्फ फिलीपींस के लिए नहीं, बल्कि पूरे एशिया के लिए एक बड़ा संदेश था।

Source:ai


पहले भी हटी थी सजा, फिर वापस लाई गई थी

दिलचस्प बात यह है कि फिलीपींस पहले भी मृत्युदंड हटाने वाला पहला एशियाई देश बन चुका था। साल 1987 में तानाशाह फर्डिनेंड मार्कोस की सत्ता जाने के बाद बने नए संविधान में मृत्युदंड को खत्म कर दिया गया था। लेकिन बढ़ते अपराध, खासकर हत्या, रेप और अपहरण जैसे मामलों को रोकने के नाम पर 1993 में राष्ट्रपति फिडेल रामोस के कार्यकाल में इसे फिर से लागू कर दिया गया था। इसके बाद देश में सात लोगों को फांसी दी गई, जिनमें 1999 में लियो एचेगारे का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जिसे अपनी सौतेली बेटी से रेप के आरोप में लेथल इंजेक्शन से सजा दी गई थी।

हजारों कैदियों की सजा बदली, फिर आया बड़ा फैसला

अप्रैल 2006 में राष्ट्रपति अरोयो ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 1230 से ज्यादा मृत्युदंड के कैदियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, जिसे आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक क्षमादान की घटनाओं में गिना जाता है। इसके कुछ ही हफ्तों बाद फिलीपींस की संसद ने भारी बहुमत से मृत्युदंड खत्म करने वाला बिल पास कर दिया। आखिरकार 24 जून 2006 को राष्ट्रपति अरोयो ने इस बिल पर दस्तखत कर दिए और रिपब्लिक एक्ट 9346 कानून की शक्ल में लागू हो गया, जिसके बाद फांसी की जगह उम्रकैद को ही सबसे कड़ी सजा माना जाने लगा।

वेटिकन यात्रा से एक दिन पहले लिया गया फैसला

खास बात यह रही कि अरोयो ने यह कानून ठीक उस वक्त साइन किया, जब वह अगले ही दिन वेटिकन जाकर पोप बेनेडिक्ट सोलहवें से मुलाकात करने वाली थीं। कट्टर कैथोलिक होने की वजह से उनके विरोधियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने पोप को खुश करने के लिए यह फैसला जल्दबाजी में लिया। हालांकि इसी दौरान दक्षिणी फिलीपींस में एक कार बम धमाके में छह लोगों की मौत भी हो गई थी, लेकिन अरोयो ने साफ कहा कि वह आतंक से डरकर अपने फैसलों से पीछे नहीं हटेंगी।

आज भी कायम है यह फैसला, बना मिसाल

इस कानून के बाद फिलीपींस दुनिया का 125वां देश बन गया, जिसने कानूनी तौर पर मृत्युदंड को खत्म किया। आज भी पूरे आसियान क्षेत्र में सिर्फ फिलीपींस और कंबोडिया ही ऐसे देश हैं, जिन्होंने मृत्युदंड को पूरी तरह छोड़ दिया है। बाद में राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने ड्रग्स और गंभीर अपराधों के लिए इसे वापस लाने की कोशिश की, लेकिन यह कानून आज भी अपनी जगह कायम है।


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