साइंस
की दुनिया से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। 2011 में जापान में आए भयानक भूकंप को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें खुलासा हुआ है कि भूकंप की एक लहर सीधे पृथ्वी के कोर तक गई और वहां से टकराकर वापस लौटी। इस लहर की वापसी ने पूरे जापान को थोड़ा सा पूरब की तरफ खिसका दिया। यह स्टडी साइंस मैगजीन में पब्लिश हुई है और इसे University of Chicago की वैज्ञानिक Sunyoung Park और उनकी टीम ने तैयार किया है।
11 मार्च 2011 का वो भूकंप, जिसने जापान को हिला दिया था
11 मार्च 2011 को जापान के तोहोकू इलाके में 9.0 तीव्रता का भयानक भूकंप आया था। इस भूकंप ने इतनी बड़ी सुनामी पैदा की थी कि हजारों लोगों की जान चली गई और फुकुशिमा का परमाणु प्लांट भी तबाह हो गया था। यह आज तक का सबसे ज्यादा स्टडी किया जाने वाला प्राकृतिक हादसा माना जाता है। लेकिन इतने सालों बाद भी इससे जुड़े नए राज सामने आ रहे हैं।
GPS डेटा में मिला अजीब सिग्नल
वैज्ञानिकों ने जब जापान के GPS नेटवर्क यानी GEONET के पुराने डेटा को दोबारा खंगाला, तो उन्हें एक चौंकाने वाली बात मिली। भूकंप के करीब 13 से 16 मिनट बाद, पूरे जापान के GPS स्टेशनों ने एक साथ एक छोटी लेकिन साफ हलचल रिकॉर्ड की, जिसमें पूरा देश अचानक पूरब की तरफ 5 से 6 मिलीमीटर खिसक गया। हैरानी की बात यह थी कि इस हलचल का कोई सीधा संबंध किसी जाने-पहचाने झटके या आफ्टरशॉक से नहीं था।
आखिर क्यों खिसका जापान, समझिए पूरा विज्ञान
रिसर्च टीम ने पाया कि मुख्य भूकंप से निकली एक खास तरह की लहर, जिसे ScS वेव कहा जाता है, सीधे धरती के अंदर करीब 2900 किलोमीटर नीचे पृथ्वी के कोर तक पहुंची। चूंकि पृथ्वी का बाहरी कोर तरल अवस्था में है, इस वजह से यह लहर वहां से बिलियर्ड बॉल की तरह टकराकर वापस ऊपर की तरफ लौट आई। नीचे जाने और वापस आने का यह पूरा सफर लगभग 13 मिनट में पूरा हुआ। जब यह लहर वापस जापान पहुंची, तो उसमें इतनी ताकत बची हुई थी कि उसने पहले से दबाव में चल रही टेक्टोनिक प्लेटों को थोड़ा और खिसका दिया।
छोटी सी हलचल, लेकिन बड़ी ऊर्जा
हालांकि यह खिसकाव सिर्फ कुछ मिलीमीटर का ही था और इंसानों को इसका एहसास भी नहीं हुआ, लेकिन इससे जो ऊर्जा रिलीज हुई, वो करीब 7.5 तीव्रता के भूकंप के बराबर थी। सबसे खास बात यह है कि यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने साबित किया है कि पृथ्वी के कोर से टकराकर लौटने वाली लहर भी जमीन के नीचे की प्लेटों को खिसका सकती है। इससे पहले ऐसा कोई उदाहरण रिकॉर्ड में नहीं था।
वैज्ञानिकों के लिए नया खतरा, नई चुनौती
इस खोज ने भूकंप विज्ञान की दुनिया में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अब तक माना जाता था कि बड़े भूकंप के तुरंत बाद ही खतरा सबसे ज्यादा होता है, लेकिन इस स्टडी से पता चला है कि भूकंप के काफी मिनट बाद भी, धरती के अंदर से लौटने वाली लहरें नया खतरा पैदा कर सकती हैं। वैज्ञानिकों ने इसे एक बिल्कुल नई तरह का सिस्मिक हैजार्ड बताया है, जिस पर आगे और रिसर्च होनी जरूरी है।
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