अयोध्या (UP) बाबा के राज में चोरी !
राम मंदिर से जुड़ी एक खबर ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोप लगे हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT बना दी है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में चोरी की रकम 150 से 200 करोड़ रुपए तक बताई जा रही है, हालांकि इस आंकड़े की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
मंदिर परिसर में करीब 40 दान पेटियां लगी हैं, जहां रोजाना हजारों श्रद्धालु चढ़ावा डालते हैं। रात में मंदिर बंद होने के बाद इन पेटियों को एक गुप्त कमरे में खोला जाता है और नोटों की गिनती की जाती है। बताया जा रहा है कि इस गिनती के काम में लगे कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बहुत कम समय में अचानक बदल गई, जिसके बाद शक पैदा हुआ। कुछ कर्मचारियों के पास से लाखों की नकदी, महंगी गाड़ियां और प्रॉपर्टी मिलने की बात सामने आई।
SIT ने शुरू की सख्त जांच
लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई में SIT टीम अयोध्या पहुंची और मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ-साथ व्यवस्थापक गोपाल राव से भी लंबी पूछताछ की। टीम ने चढ़ावे की गिनती से जुड़े सभी रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिए हैं। जांच में सामने आया कि गिनती का काम ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और एक कलेक्शन एजेंसी के करीब 40 कर्मचारी मिलकर करते हैं।
ट्रस्ट का आया पहला बयान
विवाद बढ़ता देख श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से भी सफाई आई। ट्रस्ट ने कहा कि उन्होंने खुद निष्पक्ष जांच की मांग की थी ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। ट्रस्ट की निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने भी कहा कि सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई करना काफी नहीं होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए पूरे सिस्टम में सुधार करना भी जरूरी है।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
इस पूरे विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक चिट्ठी भेजी गई है, जिसमें मांग की गई है कि कोर्ट इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे CBI से करवाने का आदेश दे। याचिका में कहा गया है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला होने की वजह से जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
अभी क्या है स्थिति
फिलहाल चोरी की सही रकम को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, और मामला अभी जांच के दायरे में है। SIT लगातार अयोध्या में डेरा डाले हुए है और कई कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ कर रही है। आने वाले दिनों में जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि असल में कितनी रकम की गड़बड़ी हुई और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार है।
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