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Norway के सबसे बड़े अखबार ने बनाया मोदी का सपेरा cartoon भारत में उठा तूफान, MEA ने दिया करारा जवाब!

 मोदी का cartoon जिसने पूरे देश में आग लगा दी

18 मई 2026 को PM मोदी Norway पहुंचे। लेकिन उनके Oslo पहुंचने से कुछ घंटे पहले ही Norway के सबसे बड़े अखबार Aftenposten ने एक ऐसा cartoon छापा जिसने पूरे भारत में आग लगा दी। Journalist Frank Rossavik के एक opinion piece के साथ यह cartoon छपा। Piece का headline था "A Clever and Slightly Annoying Man" यानी हिंदी में "एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी।" और उस headline के साथ जो illustration था वो देखकर हर भारतीय का खून खौल उठा। Cartoon में PM मोदी को cross-legged बैठकर बांसुरी बजाते हुए दिखाया गया था और उनके सामने एक basket से fuel station pipe एक सांप की तरह उठ रही थी। यानी मोदी को एक सपेरे के रूप में दिखाया गया था।

Source: socialmedia 


"यह journalism नहीं, colonial-era racism है"

जैसे ही यह cartoon social media पर वायरल हुआ, दुनियाभर से गुस्से की लहर उठी। Carl Wheless नाम के एक user ने X पर लिखा  "Norway के सबसे बड़े अखबार ने मोदी का सपेरे जैसा cartoon छापा और उन्हें 'sneaky and slightly annoying man' कहा। यह journalism नहीं है। यह colonial-era racism है जो commentary के भेस में आई है। वो India की तरक्की बर्दाश्त नहीं कर सकते इसलिए वही पुराने घिसे-पिटे stereotypes इस्तेमाल करते हैं।" एक अन्य user ने लिखा "क्या Aftenposten कभी Nigerian President का witch doctor जैसा cartoon छापेगा? नहीं। तो फिर भारत के PM के साथ यह भेदभाव क्यों?"

मोदी ने खुद 2014 में की थी "सपेरे" वाले image को खत्म करने की बात

इस पूरे विवाद में एक और दिलचस्प angle है। PM मोदी ने खुद 2014 में Madison Square Garden में अपने भाषण में कहा था  "एक ज़माने में दुनिया भारत को snake charmers का देश मानती थी। आज वही भारत mouse charmers का देश बन गया है जो technology की दुनिया में क्रांति ला रहा है।" यानी जिस stereotype को मोदी खुद खत्म करने की बात कर रहे थे, Norway के सबसे बड़े अखबार ने उसी stereotype का इस्तेमाल उन्हीं के खिलाफ किया। इस irony को लोगों ने खूब उठाया।

MEA का करारा जवाब  "selective reports पर बनते हैं opinions"

India के Ministry of External Affairs के Secretary Sibi George ने Norway में इस पूरे विवाद पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने press freedom के सवाल पर पलटवार करते हुए कहा  "India की democratic institutions बहुत मज़बूत हैं। जो लोग India को judge करते हैं वो अक्सर 'ignorant NGOs' की selective reports पढ़कर opinion बनाते हैं। उन्हें India की media landscape की विविधता और scale नहीं पता।" Sibi George का यह बयान Norway में खूब चर्चा में रहा।

Helle Lyng का सवाल और cartoon का जुड़ाव

यह cartoon उसी दौरे के दौरान आया जब Norwegian journalist Helle Lyng ने मोदी से पूछा था  "Why don't you take some questions from the freest press in the world?" और मोदी बिना जवाब दिए चले गए थे। Helle ने बाद में X पर सवाल पूछा कि Norway को India पर भरोसा क्यों करना चाहिए जब वहाँ human rights violations हो रहे हैं। इस पूरे background में Aftenposten का cartoon एक और layer जोड़ गया और Norway-India के रिश्तों में एक अजीब सी कड़वाहट आ गई।

"Colonial arrogance अभी भी ज़िंदा है"  भारतीयों का गुस्सा

Social media पर भारतीयों का गुस्सा देखते ही बनता था। लोगों ने लिखा "Europeans अभी भी अपनी colonial fantasies से बाहर नहीं आए।" किसी ने कहा  "यह racist है, xenophobic है और outdated Western portrayal है।" कुछ European commentators ने इसे political satire बताकर बचाव किया। लेकिन ज़्यादातर लोगों का कहना था कि किसी elected नेता की national identity को racialised imagery से निशाना बनाना legitimate political commentary नहीं बल्कि structural racism है।

क्या Aftenposten ने माफी मांगी?

Aftenposten की तरफ से अभी तक कोई माफी नहीं आई है। Journalist Frank Rossavik ने भी कोई public statement नहीं दिया। India सरकार ने आधिकारिक तौर पर Norway से इस cartoon पर कोई formal protest नहीं किया है। लेकिन diplomatic channels में यह मामला ज़रूर उठाया गया है।


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