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जनगणना में संपत्ति छिपा रहे लोग गलत जानकारी दी तो जेल भी हो सकती है

 देश की पहली डिजिटल जनगणना शुरू हो चुकी है

भारत में 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू हो चुका है। यह पूरी तरह डिजिटल जनगणना है जिसमें घर की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं, परिवार के सदस्यों और संपत्ति से जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। देश में पहली बार यह सुविधा दी गई है कि नागरिक खुद डिजिटल तरीके से अपना और अपने परिवार का ब्योरा दर्ज कर सकते हैं। लेकिन जमीन पर जो हो रहा है वो चिंता बढ़ाने वाला है।

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संपत्ति के सवाल पर क्यों हिचकिचा रहे हैं लोग?

जनगणना के दौरान लोगों को फॉर्म के कई सवाल चौंका रहे हैं। गाड़ी है तो कितनी, घर में कितने कमरे हैं, टीवी है या नहीं, इंटरनेट का कनेक्शन है या नहीं  यह सब पूछा जा रहा है और इन्हीं सवालों पर बड़ी संख्या में लोग झूठ बोल रहे हैं या जानकारी छिपा रहे हैं। किसी ने दो कारें होते हुए एक बताई, किसी ने बड़े घर के कमरे कम बताए। आखिर क्यों?
वजह साफ है लोगों को डर है कि यह जानकारी आगे चलकर उनके खिलाफ इस्तेमाल होगी। कोई सोच रहा है कि संपत्ति का ब्योरा देने से टैक्स बढ़ेगा। कोई सोच रहा है कि सरकारी योजनाओं का फायदा बंद हो जाएगा। कोई सोच रहा है कि यह जानकारी किसी और एजेंसी तक पहुंच जाएगी।

अधिकारियों ने किया साफ घबराने की कोई ज़रूरत नहीं

जिला जनगणना अधिकारी विनीत कुमार सिंह और एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने साफ किया है कि जनगणना में चल-अचल संपत्ति की जानकारी छिपाने की कोई जरूरत नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि जनगणना का डेटा सिर्फ सरकारी योजनाओं और नीतियों को बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। इसका कर विभाग या किसी और एजेंसी से कोई सीधा संबंध नहीं है।

लेकिन पकड़े गए तो होगी सख्त कार्रवाई

अगर किसी का घर बड़ा है लेकिन उसने कमरों की संख्या कम बताई तो प्रगणक जांच करेंगे। अगर घर में दो-तीन गाड़ियाँ हैं लेकिन मालिक सिर्फ एक बताता है तो नंबर प्लेट और दूसरे तरीकों से सत्यापन किया जाएगा। और अगर जानबूझकर गलत जानकारी पकड़ी गई तो जनगणना अधिनियम के तहत जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

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इस बार जनगणना में Left बार पूछे जा रहे यह सवाल

इस जनगणना में पहली बार लिव-इन में रहने वाले जोड़ों का भी डेटा इकट्ठा किया जाएगा। इसके अलावा रसोई में LPG या PNG कनेक्शन है या नहीं, खाना पकाने के लिए क्या इस्तेमाल होता है, शौचालय और स्नान की सुविधा है या नहीं यह सब भी पूछा जा रहा है। यह सब जानकारी सरकारी योजनाओं को सही लोगों तक पहुंचाने के लिए ज़रूरी है

डिजिटल जनगणना कैसे भरें आसान तरीका

नागरिकों को जानकारी दर्ज करने के बाद फाइनल सबमिशन करना होगा जिसके बाद 11 अंकों का एक विशेष आईडी मिलेगा। जब प्रगणक घर आएंगे तो उन्हें यह आईडी दिखाना होगा। अगर आपने पहले से ऑनलाइन जानकारी भर दी है तो प्रगणक सिर्फ उसे verify करेगा और काम जल्दी खत्म हो जाएगा।

जनगणना क्यों ज़रूरी है समझो असली बात

जनगणना का डेटा ही तय करता है कि किस राज्य को कितने सांसद मिलेंगे, किस इलाके को कितना बजट मिलेगा, कहाँ नए स्कूल-अस्पताल बनेंगे और कौन सी सरकारी योजना किसे मिलेगी। अगर आपने गलत जानकारी दी तो नुकसान किसी और का नहीं बल्कि आपके अपने इलाके का होगा। सही जानकारी देना देशभक्ति भी है और अपने इलाके की बेहतरी भी।


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