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भारत के पास कितना विदेशी मुद्रा भंडार बचा? डॉलर संकट के बीच सरकार क्या-क्या कर सकती है बैन

 विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर क्यों बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, जबकि आयात बिल तेजी से बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सरकार अब विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कुछ बड़े फैसलों पर विचार कर रही है। 

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भारत के पास अभी कितना विदेशी मुद्रा भंडार है

हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत के पास करीब 690 से 703 अरब डॉलर के आसपास विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। सरकार का कहना है कि फिलहाल देश के पास लगभग 60 दिनों तक पेट्रोल-डीजल और प्राकृतिक गैस का स्टॉक मौजूद है, जबकि एलपीजी का करीब 45 दिनों का भंडार है। हालांकि लगातार बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के कारण सरकार सतर्क मोड में आ गई है। 

डॉलर बचाने के लिए किन चीजों पर लग सकती है रोक

सरकार अब उन चीजों पर सख्ती करने पर विचार कर रही है जिनसे बड़ी मात्रा में डॉलर बाहर जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोना, इलेक्ट्रॉनिक सामान और गैर-जरूरी आयात पर नियंत्रण लगाने की चर्चा चल रही है। इसके अलावा विदेश यात्राओं और लग्जरी खर्चों को कम करने की अपील भी की जा रही है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव घटाया जा सके। 

सोना खरीदने पर क्यों बढ़ा फोकस

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में देश का गोल्ड इम्पोर्ट 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा असर पड़ा। यही वजह है कि सरकार और कई राज्य सरकारें लोगों से फिलहाल सोना खरीदने से बचने की अपील कर रही हैं। 

पेट्रोल-डीजल और विदेश यात्रा पर भी नजर

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी हाल में लोगों से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को टालने की अपील की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार अगर भारत सिर्फ तेल आयात में 10 प्रतिशत कटौती कर दे, तो अरबों डॉलर की बचत हो सकती है। वहीं विदेश यात्रा पर खर्च कम होने से भी विदेशी मुद्रा भंडार को राहत मिल सकती है। 

रुपये पर क्यों बढ़ रहा है दबाव

ईरान-इजराइल और पश्चिम एशिया के तनाव का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने के बाद आयात महंगा हो गया है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है। इसी कारण रुपया लगातार कमजोर होता दिख रहा है और रिजर्व बैंक को भी बाजार में दखल देना पड़ रहा है। 

आने वाले दिनों में क्या हो सकता है

अगर वैश्विक हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो सरकार विदेशी मुद्रा बचाने के लिए और सख्त कदम उठा सकती है। आने वाले समय में गैर-जरूरी आयात, लग्जरी सामान और विदेश खर्चों पर नई पाबंदियां देखने को मिल सकती हैं। फिलहाल सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर सतर्कता साफ दिखाई देने लगी है।



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