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22 मई को क्यों मनाया जाता है जैव विविधता दिवस?,जो पृथ्वी के भविष्य से जुड़ी है!

ज़रा सोच के देखो अगर एक दिन मधुमक्खियाँ गायब हो जाएं

एक पल के लिए सोचो। अगर कल सुबह उठो और पता चले कि दुनिया भर की मधुमक्खियाँ गायब हो गई हैं। लगेगा  "अरे, मधुमक्खियाँ गईं तो क्या हुआ?" लेकिन सच यह है कि मधुमक्खियाँ गायब होने के सिर्फ दो साल के भीतर दुनिया की 70% फसलें खत्म हो जाएंगी। खाने का संकट आएगा। इंसानों की आबादी का बड़ा हिस्सा भूखा रहेगा। यह सिर्फ एक उदाहरण है। पृथ्वी पर हर जीव, हर पेड़, हर पौधा और हर कीड़ा किसी न किसी तरह हमारी ज़िंदगी से जुड़ा हुआ है। इसी जुड़ाव को समझने और बचाने के लिए हर साल 22 मई को जैव विविधता दिवस यानी International Day for Biological Diversity मनाया जाता है।

Source:ai

22 मई ही क्यों?  इतिहास की एक अहम तारीख

22 मई की तारीख का चुनाव बेकार नहीं हुआ। 22 मई 1992 को Nairobi में Convention on Biological Diversity यानी CBD का text officially adopt हुआ था। यह वो ऐतिहासिक समझौता था जिसमें दुनिया के देशों ने पहली बार मिलकर यह माना कि पृथ्वी की जैव विविधता खतरे में है और इसे बचाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। 1992 में Rio de Janeiro के Earth Summit में इस treaty पर signatures हुए। United Nations ने पहले December 29 को यह दिवस मनाना शुरू किया था लेकिन 2000 में इसे बदलकर 22 मई कर दिया गया ताकि ज़्यादा से ज़्यादा देश इसमें भाग ले सकें।

2026 की theme "Acting Locally for Global Impact"

इस साल 2026 में जैव विविधता दिवस की theme है "Acting Locally for Global Impact" यानी "स्थानीय कार्रवाई से वैश्विक बदलाव।" इस theme का मतलब है कि दुनिया को बचाने के लिए सिर्फ बड़े नेताओं और सरकारों का काम नहीं है। हर गांव, हर शहर, हर व्यक्ति जो अपने आसपास के पेड़ बचाता है, पानी बचाता है, कूड़ा कम करता है  वो भी दुनिया बचाने में हिस्सेदार है। यह theme Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework से जुड़ी है जो 2022 में बनी थी और जिसमें 2030 तक की 23 global targets तय की गई हैं।

जैव विविधता है क्या आसान भाषा में

जैव विविधता का मतलब है पृथ्वी पर जीवन की विविधता। इसमें तीन चीज़ें शामिल हैं। पहली genetic diversity यानी एक ही प्रजाति के अलग-अलग जीवों में अंतर। दूसरी species diversity यानी अलग-अलग प्रजातियां जैसे बाघ, हाथी, गिद्ध, कमल। तीसरी ecosystem diversity यानी अलग-अलग वातावरण जैसे जंगल, समुद्र, रेगिस्तान। इन तीनों का संतुलन ही पृथ्वी को रहने लायक बनाता है।

कितना बड़ा है संकट  आंकड़े डरा देंगे

आज पृथ्वी पर species extinction की दर पिछले एक करोड़ साल के मुकाबले दस से सौ गुना ज़्यादा है। हर घंटे तीन से ज़्यादा प्रजातियां हमेशा के लिए खत्म हो रही हैं। दुनिया के 40% amphibians यानी मेंढक, सांप जैसे जीव खतरे में हैं। 33% समुद्री mammals खतरे में हैं। दुनिया के 50% से ज़्यादा coral reefs पिछले 30 सालों में खत्म हो गए। Amazon rainforest जिसे "पृथ्वी का फेफड़ा" कहते हैं वो 17% पहले ही कट चुका है। यह सिर्फ प्रकृति का नुकसान नहीं है  यह हमारा नुकसान है।

इंसान पर क्या असर होता है जैव विविधता खत्म होने से?

यह सवाल बहुत ज़रूरी है। जैव विविधता खत्म होने से खाने का संकट आता है क्योंकि फसलों के लिए pollination करने वाले कीड़े मर जाते हैं। दवाइयां खत्म होती हैं क्योंकि दुनिया की 25% दवाइयां जंगल के पौधों से बनती हैं। पानी की कमी होती है क्योंकि जंगल पानी को ज़मीन में रोकते हैं। बाढ़ और सूखा बढ़ता है क्योंकि ecosystem का संतुलन बिगड़ जाता है। नई बीमारियाँ आती हैं क्योंकि जब जानवरों का natural habitat खत्म होता है तो वो human areas में आते हैं और नए viruses फैलाते हैं। COVID-19 इसी का उदाहरण था।

भारत और जैव विविधता  एक खास रिश्ता

भारत दुनिया के 17 "megadiverse" देशों में से एक है। इसका मतलब है कि दुनिया की 60-70% जैव विविधता इन्हीं 17 देशों में पाई जाती है। भारत में 45,000 से ज़्यादा पौधों की प्रजातियाँ हैं। 91,000 से ज़्यादा जानवरों की प्रजातियाँ हैं। Western Ghats, Eastern Himalayas, Indo-Burma और Sundalands  यह चार biodiversity hotspots भारत में हैं। Project Tiger, Project Elephant, National Biodiversity Authority जैसे कार्यक्रम चल रहे हैं। लेकिन बढ़ता प्रदूषण, घटते जंगल और climate change इन सब पर भारी पड़ रहे हैं।

हम क्या कर सकते हैं छोटे कदम बड़ा असर

जैव विविधता बचाना सिर्फ सरकारों का काम नहीं है। हर इंसान कुछ न कुछ कर सकता है। अपने घर में या छत पर एक पेड़ लगाओ। Plastic का इस्तेमाल कम करो क्योंकि यह समुद्री जीवों को मार रहा है। पानी बर्बाद मत करो। Local और seasonal खाना खाओ ताकि दूर से सामान लाने में energy कम खर्च हो। अपने आसपास के पार्कों और जंगलों को साफ रखो। बच्चों को प्रकृति से जोड़ो। यह छोटे-छोटे कदम मिलकर एक बड़ा फर्क डालते हैं।



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