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10 साल की मासूम के साथ दरिंदगी और हत्या और प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंस रही थी पुलिस, देश में भड़का गुस्सा!

मामला ऐसा कि पूरे देश का खून खौला दिया

तमिलनाडु के कोयंबटूर के सुलूर इलाके में 10 साल की एक मासूम बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न और फिर बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह अपने आप में दिल दहला देने वाली खबर थी। लेकिन जो उसके बाद हुआ उसने पूरे देश को झकझोर दिया। पुलिस ने इस मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। और उस प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिसमें एक महिला अधिकारी समेत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खिलखिलाकर हंस रहे थे। 10 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी और हत्या के मामले की जानकारी देने से ठीक पहले यह हंसी  यह देखकर पूरा देश आगबबूला हो गया।

Source:ai


क्या हुआ था उस मासूम के साथ?

कोयंबटूर के सुलूर इलाके में रहने वाली 10 साल की वो बच्ची अपने घर के आसपास खेल रही थी। एक दरिंदे ने उसे अपने जाल में फंसाया, उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और फिर सबूत मिटाने के लिए उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। जब परिवार को बच्ची नहीं मिली तो तलाश शुरू हुई। जो मिला वो देखकर हर किसी की आँखें भर आईं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मामला दर्ज कर लिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंसते अधिकारी वीडियो वायरल

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का जो वीडियो सामने आया वो देखकर हर संवेदनशील इंसान का दिल टूट गया। वीडियो में साफ दिख रहा था कि एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी आर.वी. रम्या भारती समेत तीन पुलिस अधिकारी आपस में बातें करते हुए खिलखिलाकर हंस रहे थे। यह वो पल था जब उन्हें एक मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के बारे में मीडिया को जानकारी देनी थी। उस हंसी ने पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ा दी।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

यह वीडियो जैसे ही X और Instagram पर वायरल हुआ, लोगों का गुस्सा देखते ही बनता था। एक user ने लिखा "एक 10 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी हुई और ये लोग हंस रहे हैं? यह पुलिस है या कोई पार्टी में आए मेहमान?" दूसरे ने लिखा "अगर यही संवेदनशीलता है तो ऐसे अधिकारियों को वर्दी पहनने का कोई हक नहीं।" तमिलनाडु के कई बड़े नेताओं ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। महिला संगठनों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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अधिकारी की सफाई "गलती हो गई"

जब वीडियो वायरल होने के बाद बवाल मचा तो संबंधित महिला अधिकारी ने सफाई देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वो प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले किसी दूसरी बात पर हंस रहे थे और उन्हें नहीं पता था कि कैमरा चल रहा है। लेकिन देश ने यह सफाई नहीं मानी। लोगों का कहना था कि एक 10 साल की मासूम के साथ हुई दरिंदगी के मामले में पुलिस को उस पूरे दिन हंसने का कोई हक नहीं था।

यह पहली बार नहीं पुलिस की संवेदनहीनता का पुराना इतिहास

यह घटना पुलिस की संवेदनहीनता का पहला मामला नहीं है। 2012 में दिल्ली के निर्भया कांड में भी पुलिस के रवैये पर सवाल उठे थे। 2019 में Hyderabad के Disha rape-murder case में भी पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे थे। बार-बार यही सवाल उठता है कि जिन लोगों पर देश की बेटियों की रक्षा की ज़िम्मेदारी है वो कब संवेदनशील होंगे? कब तक बच्चियों के साथ दरिंदगी के मामलों में पुलिस की यही बेरुखी देखनी पड़ेगी?

एक मासूम की मौत और एक बड़ा सवाल

10 साल की वो बच्ची आज इस दुनिया में नहीं है। उसके माता-पिता का दर्द कोई समझ नहीं सकता। और जब ऐसे में जो लोग उसे न्याय दिलाने की ज़िम्मेदारी उठाते हैं वो हंसते नज़र आएं तो यह सिर्फ एक वीडियो नहीं बल्कि हमारे पूरे सिस्टम की विफलता का सबूत है। जब तक हमारे समाज में हर बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती और जब तक पुलिस में सच्ची संवेदनशीलता नहीं आती तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और ऐसे वीडियो वायरल होते रहेंगे।



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