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बैटरी खत्म तो फोन खत्म? 2027 से यह झंझट हमेशा के लिए खत्म!

 वो दिक्कत जो हर किसी को होती है

फोन लिया था पचास हज़ार का, दो साल में बैटरी ऐसी हो गई कि दिन भर चार्जर ढूंढते रहो। सुबह सौ फीसदी चार्ज करो, दोपहर तक बीस पर आ जाए। नया फोन लेने की ज़रूरत नहीं, सिर्फ बैटरी बदलनी है लेकिन फोन इस तरह बना है कि खुद बदल नहीं सकते। सर्विस सेंटर जाओ, घंटों लाइन लगाओ, हज़ार-दो हज़ार खर्च करो। यह दिक्कत दुनिया के हर स्मार्टफोन यूज़र की है। लेकिन अब यूरोप ने एक ऐसा कानून बना दिया है जो इस पूरी तस्वीर को बदल देगा और इसका असर सिर्फ यूरोप पर नहीं, पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

Source:wikimedia 

क्या है यह नया नियम?

यूरोपीय संघ यानी EU ने एक नया कानून बनाया है जिसका नाम है EU Batteries Regulation 2023/1542। इस कानून के मुताबिक 18 फरवरी 2027 से यूरोप में बिकने वाले हर स्मार्टफोन में बैटरी ऐसी होनी चाहिए जिसे यूज़र खुद घर पर आम औज़ारों से बदल सके। कोई सर्विस सेंटर नहीं, कोई माहिर मिस्त्री नहीं  बस खुद बैठो और बैटरी बदल लो। इसके साथ ही यह भी ज़रूरी होगा कि कंपनियाँ फोन के स्पेयर पार्ट्स दस साल तक उपलब्ध रखें और मरम्मत की जानकारी सबके लिए खुली रखें।

फोन का साइज़ बड़ा क्यों होगा

अब तक कंपनियाँ फोन को पतला और हल्का बनाने के चक्कर में बैटरी को अंदर चिपका देती थीं गोंद लगाकर, सील करके। इसी वजह से आजकल के फोन इतने पतले होते हैं। लेकिन जब बैटरी को खुद बदलने लायक बनाना होगा तो फोन को थोड़ा मोटा और बड़ा करना पड़ेगा। अंदर एक ऐसी जगह बनानी होगी जहाँ से बैटरी आसानी से निकाली और लगाई जा सके। यह पुराने Nokia और Samsung के उन फोन जैसा होगा जिनकी पीठ खोलो और बैटरी निकाल लो  लेकिन अब यह नए ज़माने के स्मार्टफोन में होगा।

Apple और Samsung को भी करना होगा बदलाव

यह सुनकर हैरानी होती है लेकिन यह सच है Apple का iPhone और Samsung का Galaxy, दोनों को अपना डिज़ाइन बदलना होगा। आजकल इन फोन को खोलना इतना मुश्किल है कि घर पर कोशिश करो तो फोन खराब हो सकता है। लेकिन नए नियम के बाद इन्हें ऐसा बनाना होगा जो आम आदमी भी खोल सके। फ्रांस की मरम्मत सूचकांक में कम अंक मिलने के बाद Apple पहले से ही अपने iPhone के डिज़ाइन पर दोबारा सोच रहा है। Samsung भी अपनी Galaxy सीरीज़ में बदलाव की तैयारी में है।

बैटरी भी होगी ज़्यादा मज़बूत

सिर्फ बदलने की सुविधा ही नहीं  नए नियम के मुताबिक बैटरी की गुणवत्ता भी बेहतर होनी चाहिए। 800 बार चार्ज करने के बाद भी बैटरी की ताकत कम से कम 80 फीसदी बची रहनी चाहिए। यानी दो-तीन साल बाद भी बैटरी उतनी ही दमदार रहे जितनी पहले दिन थी। अभी ज़्यादातर फोन की बैटरी डेढ़-दो साल में ही कमज़ोर पड़ने लगती है।

क्या भारत पर भी पड़ेगा असर?

यह यूरोप का कानून है, तो भारत पर सीधे लागू नहीं होता। लेकिन असर ज़रूर पड़ेगा। कारण यह है कि Apple, Samsung, Xiaomi, OnePlus जैसी कंपनियाँ पूरी दुनिया के लिए एक जैसे फोन बनाती हैं। यूरोप के लिए अलग डिज़ाइन और बाकी दुनिया के लिए अलग डिज़ाइन बनाना बहुत महंगा और मुश्किल है। तो जब ये कंपनियाँ यूरोप के नियम के हिसाब से फोन बनाएंगी तो वही फोन भारत में भी आएगा। यानी भारतीय यूज़र को भी फायदा मिलेगा बिना किसी कानून के।

यह बदलाव क्यों ज़रूरी था?

हर साल दुनिया भर में करोड़ों फोन सिर्फ इसलिए कूड़े में फेंके जाते हैं क्योंकि उनकी बैटरी खत्म हो गई। फोन का बाकी हिस्सा बिल्कुल ठीक होता है, सिर्फ बैटरी कमज़ोर होती है। EU के अनुमान के मुताबिक यूरोप में हर साल करीब एक करोड़ बीस लाख टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा होता है। इस नए कानून का मकसद यह है कि लोग फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करें, बैटरी बदलें और नया फोन खरीदने की ज़रूरत कम से कम पड़े।

आम आदमी को क्या फायदा होगा?

फायदा सीधा और बड़ा है। अभी बैटरी बदलवाने में एक से दो हज़ार रुपये लग जाते हैं और सर्विस सेंटर के चक्कर काटने पड़ते हैं। कल को खुद बदल सकोगे तो सिर्फ बैटरी की कीमत देनी होगी जो बहुत कम होगी। फोन पाँच-छह साल तक चलेगा। नया फोन खरीदने पर जो पचास-साठ हज़ार खर्च होते हैं वो बचेंगे। और सबसे बड़ी बात अपने फोन पर तुम्हारा खुद का कंट्रोल होगा।

2027- वो साल जब स्मार्टफोन की दुनिया बदलेगी

18 फरवरी 2027 यह तारीख याद रख लो। यही वो दिन है जब यूरोप में नया कानून लागू होगा और स्मार्टफोन बनाने का पुराना तरीका हमेशा के लिए बदल जाएगा। पतले और चिकने फोन की जगह अब ऐसे फोन आएंगे जो ज़्यादा टिकाऊ हों, ज़्यादा मरम्मत के लायक हों और जिन पर यूज़र का अपना हक हो। यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है — यह उस सोच की जीत है जो कहती है कि फोन खरीदने के बाद वो तुम्हारा है, कंपनी का नहीं।

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